Madhubani News: बिहार के मधुबनी जिले में सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को भंग करने वाले एक हाईटेक नकल गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। नगर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सदर एसडीपीओ वन अमित कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह गिरोह अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल कराने का संगठित नेटवर्क चला रहा था। इनके पास से भारी मात्रा में संचार उपकरण बरामद हुए हैं।
चाय की दुकान से पुलिस को मिला सुराग
इस पूरे खेल का खुलासा बुधवार 29 अप्रैल को मधुबनी रेलवे स्टेशन के पास एक चाय की दुकान से हुआ। एसपी योगेन्द्र कुमार को सूचना मिली थी कि ओवरब्रिज के नीचे एक अस्थायी दुकान पर संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। एसडीपीओ के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जब वहां छापेमारी की, तो एक बक्से में छुपाकर रखे गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने पुलिस के होश उड़ा दिए। झोले से 5 वॉकी-टॉकी और ईयरबड्स बरामद हुए, जो आमतौर पर सुरक्षा एजेंसियां इस्तेमाल करती हैं।
होटल में छापेमारी कर सरगना दबोचा गया
दुकानदार से पूछताछ के बाद पुलिस ने शहर के एक होटल में दबिश दी। वहां से बसुआरा निवासी पंकज कुमार और बेगूसराय के रौशन कुमार को हिरासत में लिया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का ठेका लेते हैं। पुलिस ने उनके पास से 5 वॉकी-टॉकी के अलावा 3 मोबाइल फोन और कनेक्टर डिवाइस भी जब्त किए हैं। यह गिरोह पिछले कई दिनों से शहर के होटलों में रुककर नेटवर्क फैला रहा था।
मद्यनिषेध सिपाही भर्ती परीक्षा थी निशाने पर
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौकाने वाली बात सामने आई है कि इस गिरोह का अगला निशाना जून 2026 में होने वाली ‘मद्यनिषेध सिपाही भर्ती परीक्षा’ थी। आरोपी स्थानीय युवाओं से संपर्क साधकर उन्हें धांधली के जरिए नौकरी दिलाने का लालच दे रहे थे। एसडीपीओ अमित कुमार के मुताबिक, गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस इस गिरोह के पिछले कारनामों को भी खंगाल रही है।
वॉकी-टॉकी और माइक्रो चिप से होती थी नकल
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद हाईटेक थी। जांच में पता चला कि ये लोग परीक्षा केंद्र के बाहर से वॉकी-टॉकी के जरिए सही उत्तरों का प्रसारण करते थे। अभ्यर्थी अपने कान में बेहद छोटे और न दिखने वाले ईयरबड्स लगाकर जाते थे, जिसके माध्यम से वे बाहर बैठे अपने आकाओं की आवाज सुनकर ओएमआर शीट (OMR Sheet) भरते थे। यह तकनीक इतनी सटीक थी कि परीक्षा हॉल में मौजूद वीक्षकों को इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
