Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के लाखों कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने सुक्खू सरकार को केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) न देने पर कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज ने इस मामले में सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया है। प्रशासन को अब चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने पूछा है कि आखिर राज्य के कर्मचारियों को केंद्र के बराबर आर्थिक लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।
याचिकाकर्ता ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
शिक्षा विभाग में तैनात सुपरिंटेंडेंट देवेंद्र सिंह ने यह कानूनी लड़ाई शुरू की है। उन्होंने याचिका में बताया कि डीए में 15 प्रतिशत की भारी कटौती हो रही है। इस अंतर के कारण उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है। देवेंद्र सिंह 1998 से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार की देरी से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। यह मामला अब प्रदेश के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
आंकड़ों की जुबानी: भारी अंतर से बढ़ी नाराजगी
राज्य सरकार ने समय-समय पर महंगाई भत्ते में मामूली बढ़ोतरी तो की है। लेकिन यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार के मुकाबले काफी पीछे रह गई है। हिमाचल में फरवरी 2022 में डीए 31 प्रतिशत था, जो अक्टूबर 2025 तक 45 प्रतिशत ही पहुँच पाया। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को वर्तमान में 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रदान कर रही है। दोनों सरकारों के बीच मौजूद यह 15 प्रतिशत का फासला ही अब कानूनी विवाद की मुख्य वजह बन गया है।
लाखों परिवारों पर पड़ेगा सीधा असर
यह अदालती कार्रवाई हिमाचल प्रदेश के करीब 1.91 लाख कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ी है। इसके साथ ही लगभग 1.71 लाख पेंशनभोगी भी इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई में कम वेतन के साथ गुजारा करना असंभव है। वे लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे थे, लेकिन समाधान न होने पर उन्हें न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 4 जून 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


