Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। शिक्षा विभाग आगामी 5 मई से काउंसलिंग का दौर शुरू करने जा रहा है। निदेशक आशीष कोहली ने पुष्टि की है कि यह पूरी प्रक्रिया पंद्रह दिनों के भीतर संपन्न कर ली जाएगी। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने स्क्रीनिंग परीक्षा के नतीजे निदेशालय को सौंप दिए हैं। अब मेरिट के आधार पर ही पात्र उम्मीदवारों को स्कूलों का आवंटन किया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा पदों का आवंटन
शिक्षा निदेशालय ने काउंसलिंग के लिए विस्तृत खाका तैयार किया है। पहले चरण में प्रधानाचार्य पदों के लिए साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया आयोजित होगी। इसके सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद प्रवक्ता पद के लिए पात्र शिक्षकों को बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि इस भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 24 जनवरी को हुई थी। इसमें प्रदेश भर से लगभग 9,821 शिक्षकों ने अपनी योग्यता साबित करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट दिया था। विभाग अब समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां करना चाहता है।
पारदर्शिता के लिए ‘मेरिट-कम-प्रेफरेंस’ फॉर्मूला
शिक्षकों की तैनाती में किसी भी प्रकार के पक्षपात को रोकने के लिए विभाग ने नई नीति अपनाई है। अब ‘मेरिट-कम-प्रेफरेंस’ के आधार पर ही स्कूलों का चुनाव संभव होगा। इसमें स्क्रीनिंग टेस्ट के अंकों को प्राथमिकता दी जाएगी। काउंसलिंग के दौरान शिक्षकों से उनकी पसंद के स्कूलों के विकल्प मांगे जाएंगे। उच्च अंक प्राप्त करने वाले शिक्षकों को उनकी पहली पसंद का स्कूल मिलने की संभावना अधिक रहेगी। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी।
पूरे प्रदेश में कहीं भी मिल सकती है तैनाती
जेबीटी और सीएंडवी श्रेणी के शिक्षक मूलतः जिला कैडर का हिस्सा होते हैं। हालांकि, सीबीएसई स्कूलों की विशेष आवश्यकता को देखते हुए उन्हें राज्य के किसी भी हिस्से में तैनात किया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से उनकी वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। वे अपने मूल कैडर में ही गिने जाएंगे। इस लचीली नीति का उद्देश्य राज्य के हर सीबीएसई स्कूल में उत्कृष्ट और अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं सुनिश्चित करना है।
प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
शिक्षा विभाग ने जमीनी स्तर पर शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए अहम फैसला लिया है। अब प्रत्येक सीबीएसई संबद्ध सीनियर सेकेंडरी स्कूल के साथ जुड़े प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम पांच जेबीटी शिक्षकों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इससे न केवल शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को शुरुआती दौर से ही बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा। विभाग का मानना है कि पर्याप्त स्टाफ होने से शिक्षण की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे।
अनुपस्थित रहने पर रद्द होगी दावेदारी
पात्र उम्मीदवारों को निर्धारित तिथि और समय पर काउंसलिंग स्थल पर पहुंचना अनिवार्य होगा। विभाग जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर पूरा शेड्यूल और स्थान की जानकारी साझा करेगा। जो शिक्षक तय समय पर उपस्थित नहीं होंगे, उनकी सीबीएसई स्कूलों में नियुक्ति की दावेदारी स्वतः ही समाप्त मान ली जाएगी। वहीं, अनुबंध और जॉब ट्रेनी के रूप में काम कर रहे शिक्षकों के लिए राहत की बात यह है कि उनकी सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।


