बिहार की सियासत में भूचाल: ‘न नीति, न लक्ष्य’, तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार की उड़ाई धज्जियां

Bihar News: बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिग्गज नेता तेजस्वी यादव ने सूबे की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नई सरकार के गठन को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक शासन की प्राथमिकताएं और नीतियां स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के सामने सरकार की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा कि सत्ता के इस खेल में आम जनता का कीमती समय और संसाधन पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं।

छह महीने में दो मुख्यमंत्री: तेजस्वी ने बताया राज्य का ‘बर्बाद समय’

तेजस्वी यादव ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के बाद महज छह महीनों के भीतर बिहार ने दो मुख्यमंत्री देख लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार के कार्यकाल के पहले वर्ष का लगभग 46.03 प्रतिशत समय बिना किसी ठोस काम के व्यर्थ चला गया है। राजद नेता के अनुसार, राजनीतिक अस्थिरता ने राज्य के विकास की गति को पूरी तरह रोक दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार खुद अपनी कुर्सी बचाने में उलझी हो, तो वह राज्य की प्रगति के लिए क्या योजना बनाएगी।

अधूरे मंत्रिमंडल और ‘नैतिकता की बलि’ पर राजद का प्रहार

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में इस वक्त बिना विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधूरे मंत्रिमंडल के सहारे सत्ता चलाई जा रही है, जो प्रशासनिक अराजकता को जन्म दे रही है। तेजस्वी ने राजग नेताओं पर नैतिकता और लोकलाज को ताक पर रखने का आरोप मढ़ते हुए कहा कि सत्ता के लालच में बार-बार गठबंधन बदले जा रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में 10 बार सरकार का पुनर्गठन होना राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के दलदल में फंसा बिहार: तेजस्वी

विपक्ष के नेता ने राज्य की कानून-व्यवस्था और वित्तीय कुप्रबंधन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार आज बेलगाम नौकरशाही, गरीबी, पलायन और अनियंत्रित भ्रष्टाचार के दुष्चक्र में फंस चुका है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के युवा, महिलाएं, किसान और व्यापारी वर्तमान सरकार से पूरी तरह निराश हो चुके हैं। राजद नेता ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि जो सरकार खुद अपने आंतरिक अंतर्विरोधों के कारण एक समस्या बन गई है, वह जनता की समस्याओं का समाधान आखिर कैसे कर पाएगी?

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