Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरणों के बाद आए एग्जिट पोल ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। भाजपा नेता सुरेश रूंगटा ने दावा किया है कि बंगाल में इस बार भारी मतदान सत्ता परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि अधिकांश एग्जिट पोल भाजपा को निर्णायक बढ़त दिखा रहे हैं, जो यह साबित करता है कि जनता अब बदलाव चाहती है। रूंगटा के अनुसार, राज्य की जनता ने विकास और सुशासन के पक्ष में अपना मत दिया है।
काम के आधार पर मिल रहा जनता का समर्थन
सुरेश रूंगटा ने जोर देकर कहा कि भाजपा को हर राज्य में उसके द्वारा किए गए ठोस कार्यों के आधार पर बहुमत मिलता है। पश्चिम बंगाल में भी यही रुझान देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है। बंगाल की जनता अब तुष्टिकरण की राजनीति के बजाय विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहती है, जिसका परिणाम चुनावी नतीजों में दिखाई देगा।
चुनावी नतीजों में ‘महिला फैक्टर’ बनेगा गेमचेंजर
भाजपा नेता ने चुनावी विश्लेषण करते हुए कहा कि इस बार महिलाओं का रुझान पार्टी के पक्ष में सबसे अधिक रहा है। महिलाओं ने बूथों पर पहुंचकर खुलकर भाजपा का समर्थन किया है। रूंगटा ने इसे चुनावी परिणामों का सबसे बड़ा ‘एक्स फैक्टर’ बताया। उनके अनुसार, सुरक्षा और सशक्तिकरण के मुद्दों पर बंगाल की महिलाओं ने मौजूदा सरकार को नकार कर भाजपा की नीतियों पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे पार्टी की जीत सुनिश्चित है।
महिला रोजगार के आंकड़ों से सरकार को घेरा
रोजगार के मोर्चे पर रूंगटा ने आंकड़ों के जरिए मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि साल 2015 में महिलाओं की रोजगार दर महज 15% थी, जो 2025 में बढ़कर 40\% तक पहुंच गई है। इसके साथ ही महिलाओं की बेरोजगारी दर, जो पहले 6\% से अधिक हुआ करती थी, अब घटकर लगभग 3\% रह गई है। उन्होंने दावा किया कि इन नीतियों के कारण ही महिलाओं को देश भर में अधिक अवसर मिल रहे हैं।
“गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा का परचम”
सुरेश रूंगटा ने अपने बयान के अंत में एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल में भाजपा की संभावित जीत का असर पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। उन्होंने नारा देते हुए कहा कि अब ‘गंगोत्री से गंगासागर’ तक केवल भाजपा का ही परचम लहराएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूंगटा का यह बयान न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला है, बल्कि विरोधियों के लिए भी एक कड़ी चुनौती है।
