हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: ईरान ने अमेरिका को दी ‘तबास और इस्फहान’ दोहराने की चेतावनी

Iran News: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी भारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं की, तो उसे ‘तबास और इस्फहान’ जैसे विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। एजेई के इस बयान ने फारस की खाड़ी में पहले से ही नाजुक बनी कूटनीतिक स्थिति को और अधिक अनिश्चित बना दिया है, जिससे युद्ध की आशंका गहरा गई है।

अमेरिकी नाकेबंदी को ईरान ने बताया ‘युद्ध अपराध’

ईरानी न्यायपालिका प्रमुख ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी पोस्ट में अमेरिकी क्षमता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ प्रभावी नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की ताकत नहीं है। एजेई ने इस नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और एक ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर दबाव कम नहीं किया गया, तो ईरानी सशस्त्र बल इसका कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

तबास की ऐतिहासिक हार का दिलाया याद

एजेई ने अपने बयान में 25 अप्रैल 1980 के ऐतिहासिक ‘तबास ऑपरेशन’ (ऑपरेशन ईगल क्लॉ) का जिक्र किया। उन्होंने इसे अमेरिकी सेना की ‘अपमानजनक हार’ बताते हुए कहा कि इसकी वर्षगांठ ईरान के स्वाभिमान का प्रतीक है। गौरतलब है कि 1980 में तेहरान से बंधकों को छुड़ाने का अमेरिकी मिशन तबास के रेगिस्तान में तकनीकी खराबी और विमानों की टक्कर के कारण बुरी तरह विफल हो गया था। इस हादसे में आठ अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिसे अमेरिका के सैन्य इतिहास में एक बड़ा धक्का माना जाता है।

इस्फहान में अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराने का दावा

ईरान ने अपनी ताजा सैन्य उपलब्धि के रूप में इस्फहान की घटना का भी उल्लेख किया है। ईरान का दावा है कि 3 अप्रैल 2026 को उसने इस्फहान के पास एक अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल (F-15E Strike Eagle) लड़ाकू विमान को मार गिराया था। हालांकि, इस घटना में विमान के पायलट और वेपंस सिस्टम ऑफिसर सुरक्षित बच निकले थे, लेकिन उन्हें बचाने के लिए अमेरिकी बचाव दल को करीब 48 घंटे का लंबा और जोखिम भरा ऑपरेशन चलाना पड़ा था। ईरान इस घटना को अपनी बढ़ती रक्षा क्षमता के प्रमाण के रूप में देख रहा है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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