Delhi News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली में लचर सीवर प्रबंधन और मैनहोल की बदहाली को लेकर दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ ने मैनहोल के भीतर पाई गई अतिरिक्त केबलों और सीवर की सफाई में बरती जा रही लापरवाही पर जल बोर्ड को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने विभाग को एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें स्थल निरीक्षण और केबल हटाने की समय-सीमा की स्पष्ट जानकारी मांगी गई है।
अदालती आदेश के बावजूद नहीं हुआ निरीक्षण
एनजीटी में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ट्रिब्यूनल ने 7 नवंबर 2025 को ही स्थल निरीक्षण के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अब तक न तो मौके पर जाकर स्थिति जांची गई और न ही इसकी कोई रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लाई गई। डीजेबी ने खुद स्वीकार किया है कि एक मैनहोल के अंदर अतिरिक्त केबल पाई गई थी, जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। इसके बाद भी बोर्ड ने उस केबल को हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसे लेकर पीठ ने गहरी नाराजगी जताई।
सीवर लाइन के दावों में सामने आया विरोधाभास
सुनवाई के दौरान गली नंबर-6, जी ब्लॉक में सीवर पाइपलाइन बदलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जल बोर्ड के रिकॉर्ड में इस शिकायत को यह कहकर बंद कर दिया गया कि ‘काम जारी है’। वहीं, दूसरी तरफ डीजेबी ने अपने हलफनामे में दावा किया कि इस गली में सीवर लाइन बिछाने का कार्य साल 2021 में ही पूरा हो चुका है। विभाग के बयानों में इस तरह के बड़े विरोधाभास को देखकर ट्रिब्यूनल ने फटकार लगाई और अधिकारियों से इस लापरवाही पर जवाब मांगा है।
जुलाई में होगी मामले की निर्णायक सुनवाई
दिल्ली जल बोर्ड के वकील ने एनजीटी से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विभाग को यह बताना होगा कि मैनहोल से केबल कब तक हटाई जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 23 जुलाई 2026 को तय की गई है। राजधानी में सीवर ओवरफ्लो और मैनहोल के भीतर अवैध केबलिंग की समस्या आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है, जिसे अब एनजीटी ने गंभीरता से लिया है।
