Uttar Pradesh News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर मचे सियासी घमासान और वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन की खबरों ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी। मेवालाल गौतम, मुनकाद अली और नौशाद अली जैसे कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर किए जाने की अफवाहें तेजी से फैलीं। सोशल मीडिया पर वायरल होती इन खबरों ने समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने खुद मोर्चा संभाला।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई फर्जी विज्ञप्ति
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इन खबरों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुलंदशहर जिलाध्यक्ष के जाली लेटरपैड का इस्तेमाल करके मेवालाल गौतम, मुनकाद अली और नौशाद अली के निष्कासन की फर्जी विज्ञप्ति जारी की गई थी। मायावती ने इसे विरोधियों की साजिश करार देते हुए कार्यकर्ताओं को सचेत किया। उन्होंने मीडिया और जनता से अपील की कि ऐसी संवेदनशील और तथ्यहीन खबरों पर भरोसा करने से पहले उनकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लें।
इन नेताओं पर गिरी पार्टी की गाज
पार्टी प्रमुख ने वास्तविक निष्कासन की जानकारी देते हुए बताया कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण कुछ पदाधिकारियों पर कार्रवाई जरूर हुई है। गाजियाबाद के जिलाध्यक्ष ने जय प्रकाश सिंह को निष्कासित किया है, जबकि बुलंदशहर जिलाध्यक्ष ने पूर्व विधायक धर्मवीर सिंह अशोक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। इन वास्तविक निष्कासनों की आड़ में शरारती तत्वों ने जाली दस्तावेजों के जरिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसे मायावती ने सिरे से खारिज कर दिया है।
अफवाहों से बचने की सख्त हिदायत
मायावती ने स्पष्ट किया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कोई भी कार्रवाई बिना ठोस सबूत और उनकी जानकारी के नहीं की जाती है। जाली लेटरपैड के जरिए फैलाई गई इस भ्रामक सूचना का मकसद बसपा की आंतरिक एकता को प्रभावित करना था। बसपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक बयान में जोर देकर कहा कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। पार्टी अब अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए कार्यकर्ताओं को सीधे अपडेट रखने की योजना बना रही है।
