Uttar Pradesh News: उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में लोको पायलट द्वारा छुट्टी बढ़ाने के लिए अपनी सर्जरी के घाव दिखाने वाले शर्मनाक मामले में रेलवे ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। घटना के केंद्र में रहे चीफ क्रू कंट्रोलर रतन कुमार का तबादला कर दिया गया है। उन्हें उनके मुख्य दायित्व ‘मुख्य लोको निरीक्षक’ के पद पर वापस भेज दिया गया है। हालांकि, रेलवे प्रशासन इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों ने इसे लोको पायलट के साथ हुए दुर्व्यवहार का परिणाम माना है।
चीफ क्रू कंट्रोलर के सामने पैंट उतारने पर हुआ था मजबूर
यह पूरा विवाद 3 मार्च को तब शुरू हुआ जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में लोको पायलट राजेश मीणा को छुट्टी की गुहार लगाते हुए अपने सीनियर अधिकारी रतन कुमार के सामने अंतःवस्त्र उतारकर पाइल्स सर्जरी के घाव दिखाते हुए देखा गया था। राजेश मीणा का आरोप था कि निजी अस्पताल में सर्जरी के बाद भी उनका घाव ठीक नहीं हुआ था। जब उन्होंने नियमानुसार ‘सिक मेमो’ के लिए संपर्क किया, तो उन्हें आराम देने के बजाय मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
जांच कमेटी ने लोको पायलट को माना था नियमों का दोषी
मामला तूल पकड़ने पर रेलवे ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राजेश मीणा का निलंबन रद्द कर दिया और उनका अवकाश एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था। इसके बाद एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई कि लोको पायलट राजेश मीणा को सेवा नियमावली का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया। इसके बावजूद, मानवीय आधार पर मीणा पर कोई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि विवादित अधिकारी को पद से हटा दिया गया।
यूनियन ने देशभर में एकजुटता का दिया संदेश
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने इस घटना को लोको पायलटों के स्वाभिमान से जोड़ते हुए देशभर में विरोध दर्ज कराया था। यूनियन लीडर्स का तर्क है कि कर्मचारियों को बीमारी की हालत में भी छुट्टी के लिए इस तरह अपमानित होना पड़ता है। अब चीफ क्रू कंट्रोलर के तबादले को एसोसिएशन अपनी नैतिक जीत मान रही है। हालांकि, रेलवे के भीतर इस घटना ने कर्मचारी और अधिकारियों के बीच के संवाद और कार्यसंस्कृति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
