गाजियाबाद के निर्यातकों पर ‘होर्मुज संकट’ की मार: अरबों के ऑर्डर रुके, भुगतान फंसा

Uttar Pradesh News: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बाद वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर छाई अनिश्चितता ने गाजियाबाद के निर्यात उद्योगों की कमर तोड़ दी है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक किए जाने और समुद्री जहाजों पर हमलों के कारण निर्यातकों ने अरबों रुपये के नए आर्डर का उत्पादन रोक दिया है। उद्यमियों को डर है कि यदि कंसाइनमेंट बीच रास्ते में फंस गया या बंदरगाहों पर अटक गया, तो करोड़ों का भुगतान डूब सकता है। इस संकट ने शहर की औद्योगिक इकाइयों में सन्नाटा पसरा दिया है।

प्रमुख औद्योगिक सेक्टर में उत्पादन ठप, मंदी की आहट

वैश्विक तनाव का सबसे सीधा असर गाजियाबाद की इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल और फार्मा इकाइयों पर पड़ा है। निर्यातकों के अनुसार, गल्फ कोआपरेशन काउंसिल (GCC) देशों से पहले नियमित ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब शिपिंग लाइन्स ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए हैं या सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। होर्मुज जल मार्ग के बार-बार बंद होने से फैब्रिकेशन और मशीनरी पार्ट्स का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। समय पर डिलीवरी न होने के कारण कई विदेशी खरीदार ऑर्डर कैंसिल करने की धमकी दे रहे हैं।

निर्यातकों का फंसा करोड़ों का भुगतान, सरकार से राहत की उम्मीद

गाजियाबाद के उद्यमियों के अनुसार, कई कंसाइनमेंट पहले से ही विभिन्न बंदरगाहों पर अटके हुए हैं। भुगतान न मिलने के कारण उद्योगों के पास वर्किंग कैपिटल की भारी किल्लत हो गई है। निर्यातक हाजी सलीम और दिनेश गर्ग का कहना है कि युद्धविराम की अनिश्चितता ने नए सौदों पर निर्णय लेना नामुमकिन बना दिया है। निर्यातकों ने सरकार से मांग की है कि इस असाधारण स्थिति को देखते हुए उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी किया जाए, अन्यथा आने वाले दो-तीन महीनों में शहर में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल सकती है।

हार्मुल जल मार्ग की अनिश्चितता बनी सबसे बड़ी बाधा

ईरान-अमेरिका संघर्ष के केंद्र में स्थित होर्मुज जल मार्ग से वैश्विक तेल और माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मार्ग के असुरक्षित होने से समुद्री बीमा (Insurance) की दरें काफी बढ़ गई हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी उछाल आया है। गाजियाबाद के खाद्य प्रसंस्करण और मीट उद्योग को भी समय पर सप्लाई न होने से भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो गाजियाबाद का निर्यात कारोबार साल 2026 की सबसे बड़ी मंदी की चपेट में आ सकता है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories