Uttar Pradesh News: नोएडा में 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस की विशेष टीमें हिंसा के पीछे किसी बड़ी साजिश और विदेशी या अवैध फंडिंग के सुराग तलाशने में जुटी हैं। इस कड़ी में ‘रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (RWPI) और संबंधित आरोपियों के 11 बैंक खातों को फ्रीज कर उनकी बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि हिंसा से ठीक पहले इन खातों में कहीं से बड़ी रकम तो नहीं आई थी।
11 बैंक खातों के लेनदेन खंगाल रही पुलिस
नोएडा पुलिस को जांच के दौरान कुल 11 संदिग्ध बैंक खाते मिले हैं। इनमें से तीन खाते सीधे तौर पर RWPI संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, पिछले चार वर्षों के दौरान इन खातों में हुए हर छोटे-बड़े लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने संबंधित बैंकों की शाखाओं से संपर्क कर विस्तृत विवरण मांगा है। अधिकारियों का मानना है कि इन खातों की जांच से हिंसा के मास्टरमाइंड और उसे आर्थिक मदद देने वाले चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है।
9 राज्यों में फैली तलाश, 150 से ज्यादा आरोपी चिह्नित
हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पथराव करने वाले 150 से अधिक आरोपियों को पुलिस अब तक चिह्नित कर चुकी है। इन आरोपियों की धरपकड़ के लिए नोएडा पुलिस की कई टीमें दिल्ली, पश्चिम बंगाल और बिहार समेत कुल 9 राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस उन चेहरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का सहारा ले रही है, जिन्होंने हिंसा के दौरान अपने चेहरे ढके हुए थे।
अपर पुलिस आयुक्त का दावा: जल्द होंगे ठोस नतीजे
अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि हिंसा मामले की जांच बहुत ही गहनता से की जा रही है। पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा के मूल कारण और इसके पीछे सक्रिय ताकतों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। आरोपियों के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि फंडिंग के पहलू पर की जा रही जांच जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगी और मामले में कई अन्य बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
