Delhi News: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की जनरल हाउस बैठक में शनिवार को एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया। कमेटी ने पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना, हरविंदर सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव दूसरी बार सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। वर्तमान अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने इन तीनों नेताओं पर अपने कार्यकाल के दौरान गुरु की गोलक के दुरुपयोग और गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली की सिख राजनीति में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
श्री अकाल तख्त के निर्देश पर बुलाई गई बैठक
DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने स्पष्ट किया कि यह विशेष बैठक श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के पालन में बुलाई गई थी। नियमानुसार, सरना बंधुओं और मनजीत सिंह जीके सहित सभी 50 सदस्यों को 15 दिन पहले ही लिखित सूचना भेज दी गई थी। इसके बावजूद, आरोपी पक्ष ने बैठक में शामिल होकर अपनी सफाई पेश करने के बजाय इससे दूरी बनाए रखी। शनिवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में 50 में से 38 सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने एक सुर में निष्कासन प्रस्ताव पर मुहर लगाई।
गोलक के दुरुपयोग और फर्जी चेक भुगतान के आरोप
महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने बैठक के दौरान भ्रष्टाचार के विवरण साझा किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरना बंधुओं ने अध्यक्ष रहते हुए गुरुद्वारे के धन का कंपनियों के माध्यम से दुरुपयोग किया। वहीं, मनजीत सिंह जीके पर अपने परिजनों के नाम पर चेक जारी कराने के गंभीर आरोप हैं। काहलों ने बताया कि जीके के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है और उनके बिना अनुमति विदेश जाने पर रोक है। अब इस प्रस्ताव की प्रति गुरुद्वारा चुनाव निदेशक और दिल्ली सरकार को कानूनी कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
जीके ने बैठक को बताया अवैध और असंवैधानिक
दूसरी ओर, मनजीत सिंह जीके ने इस पूरी प्रक्रिया को अवैध करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि डीएसजीएमसी का वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए कालका गुट को जनरल हाउस की बैठक बुलाने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। जीके के अनुसार, डीएसजीएमसी एक्ट में किसी भी निर्वाचित सदस्य की सदस्यता समाप्त करने का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इस विवाद के बीच, कमेटी के 11 सदस्यों का एक दल श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से मिलकर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देगा।
