चीन की ‘परमाणु’ चाल: समुद्र में उतरेगा अजेय सुपरकैरियर, क्या टूटेगी अमेरिकी नौसेना की बादशाहत?

China News: चीनी नौसेना (PLAN) ने अपनी स्थापना की 77वीं वर्षगांठ पर एक रहस्यमयी वीडियो जारी कर वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस वीडियो में चीन के चौथे विमानवाहक पोत की पहली झलक के साथ उसके ‘परमाणु ऊर्जा’ से संचालित होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। वीडियो में दिखाए गए एक कंपास पर ‘हे जियान’ (He Jian) नाम अंकित है, जो चीनी भाषा में परमाणु संचालित जहाज की ओर इशारा करता है। यह नया युद्धपोत चीन की ‘ब्लू-वाटर’ नेवी बनने की महत्वाकांक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

न्यूक्लियर पावर से मिलेगी असीमित समुद्री ताकत

चीन का चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर, जिसे ‘टाइप 004’ कहा जा रहा है, डालियान शिपयार्ड में निर्माणाधीन है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अनुसार, इसका आकार अमेरिका के सबसे आधुनिक ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ श्रेणी के जहाजों के बराबर है। न्यूक्लियर प्रोपल्शन तकनीक की मदद से इस महाकाय जहाज को ईंधन भरने के लिए बार-बार बंदरगाह लौटने की जरूरत नहीं होगी। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र और विश्व के अन्य महासागरों में असीमित दूरी तक बिना रुके मिशन को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम होगा।

अमेरिकी नौसेना के समकक्ष आने की बड़ी तैयारी

वर्तमान में केवल अमेरिका के पास ही 11 परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर का विशाल बेड़ा मौजूद है। चीन अब तक केवल ‘लियाओनिंग’, ‘शेडोंग’ और हालिया ‘फुजियान’ जैसे पारंपरिक ईंधन वाले जहाजों पर ही निर्भर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन टाइप 004 को सफलतापूर्वक समुद्र में उतार देता है, तो वह नौसैनिक शक्ति के मामले में सीधे तौर पर अमेरिका को टक्कर देगा। यह विकास दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।

विनाशकारी मारक क्षमता से लैस होगा नया सुपरकैरियर

चीनी रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, इस नए सुपरकैरियर का कुल वजन (डिस्प्लेसमेंट) 1,10,000 से 1,20,000 टन के बीच होने की संभावना है। इसमें लगे ट्विन न्यूक्लियर रिएक्टर्स इसे अपार शक्ति प्रदान करेंगे, जिससे इस पर 100 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकेंगे। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) से भी लैस होगा, जिससे भारी युद्धक विमानों को कम समय में उड़ान भराई जा सकेगी। भारत और क्वाड देशों के लिए चीन की यह बढ़ती नौसैनिक ताकत बड़ी चुनौती बन सकती है।

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