Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भर्ती एवं सेवा शर्त अधिनियम-2024 को निरस्त करने के बाद राज्य के करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों के लिए खुशियां लौट आई हैं। इस ऐतिहासिक फैसले ने अनुबंध सेवा अवधि को नियमित सेवा के साथ जोड़ने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया है। अब अनुबंध के आधार पर नियुक्त हुए कर्मचारियों को उनकी पूरी सेवा अवधि के आधार पर वेतन वृद्धि, एरियर और पेंशन जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ मिल सकेंगे। इससे कर्मचारियों के बीच लंबे समय से व्याप्त आर्थिक असमानता खत्म होगी।
अनुबंध कर्मचारियों के लिए ‘न्याय का सवेरा’ और संगठन की प्रतिक्रिया
हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन ने इस अदालती निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश महासचिव अनिल सेन ने इसे कर्मचारियों की सत्य पर बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद नियुक्त हुए हजारों कर्मियों को इस फैसले से सीधा लाभ पहुंचेगा। संगठन ने अब प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि सभी पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता नए सिरे से तय की जाए। साथ ही उनके लंबित वित्तीय लाभों को बिना किसी देरी के जल्द जारी किया जाए।
वर्ष 2003 से चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का सुखद अंत
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 के बाद बड़े पैमाने पर अनुबंध नियुक्तियां हुई थीं। इन कर्मचारियों को समय के साथ नियमित तो किया गया, लेकिन उनकी अनुबंध अवधि को सेवा रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। इसके कारण उनके वेतनमान और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन पर बुरा असर पड़ा। कर्मचारी इस अन्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ चुके थे। सरकार ने नया अधिनियम लाकर पुराने लाभों को वापस लेने की कोशिश की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
हिमाचल सरकार की बढ़ी मुश्किलें और वित्तीय संकट का साया
अदालती फैसले को लागू करने के लिए राज्य सरकार को अब करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान करना होगा। प्रदेश पहले से ही 1,10,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल कर्ज लेने वाले राज्यों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने और बढ़ते ब्याज के कारण सरकार की आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है। आगामी 10 वर्षों में सरकार को 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाना है।
बकाया देनदारियों का बोझ और सरकार के पास उपलब्ध विकल्प
वर्तमान में सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों की करीब 11,000 करोड़ रुपये की देनदारियां चुकानी शेष हैं। इसमें नए वेतनमान का 10,000 करोड़ रुपये का एरियर और 15 फीसदी महंगाई भत्ता (DA) शामिल है। इस बीच, राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के हर कानूनी पहलू को गहराई से खंगाल रही है। सूत्रों की मानें तो सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर भी विचार कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कर्मचारियों को राहत देती है या कानूनी जंग जारी रखती है।
