Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य में कानून व्यवस्था को अधिक सख्त बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351 के तहत आने वाले अपराधों को अब पूरे राज्य में संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित कर दिया है। गृह विभाग द्वारा जारी इस नई अधिसूचना के बाद अब पुलिस आपराधिक धमकी देने वाले आरोपियों को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रदेश की सभी सीमाओं में लागू हो गया है।
नए कानून के तहत पुलिस को मिली बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति
गृह विभाग के अनुभाग-सी द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह फैसला दंड विधि संशोधन अधिनियम, 1932 की धारा 10 की शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया गया है। अब तक आपराधिक धमकी के मामलों में पुलिस को कार्रवाई के लिए अदालती आदेश का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन संज्ञेय श्रेणी में आने से पुलिस की कार्यप्रणाली तेज होगी। इस कानून के लागू होने से असामाजिक तत्वों में डर पैदा होगा और आम जनता को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।
थाने से नहीं मिलेगी जमानत और अदालती प्रक्रिया होगी अनिवार्य
अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखने का सीधा अर्थ है कि अब आरोपियों को पुलिस स्टेशन से रिहा नहीं किया जा सकेगा। किसी भी व्यक्ति पर धारा 351 के तहत मामला दर्ज होने के बाद उसे अनिवार्य रूप से कोर्ट की प्रक्रियाओं का सामना करना होगा। जमानत के लिए अब केवल सक्षम न्यायालय ही निर्णय ले पाएगा, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह कदम प्रदेश में बढ़ रही निजी दुश्मनी और धमकियों के मामलों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 506 का स्थान लेगी धारा 351
उल्लेखनीय है कि देश में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद पुरानी आईपीसी की धारा 506 को अब बीएनएस की धारा 351 के रूप में पहचाना जाता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), कमलेश कुमार पंत के हस्ताक्षर से जारी इस अधिसूचना की प्रतियां केंद्रीय गृह सचिव और हिमाचल के पुलिस महानिदेशक को भेज दी गई हैं। जेल महानिदेशक और सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस नए कानून को सख्ती से धरातल पर क्रियान्वित करना सुनिश्चित करें।
