क्या अब सिर्फ 6 साल तक के बच्चों को मिलेगा आधार कार्ड? सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी पूरे देश की नजर

Delhi News: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आज आधार कार्ड से जुड़ी एक बेहद अहम याचिका पर सुनवाई होने जा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची की पीठ इस मामले को देखेगी। यह याचिका मांग करती है कि नए आधार कार्ड केवल छह साल तक के बच्चों को ही दिए जाएं। वयस्कों के लिए नियम कड़े करने की गुहार लगाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों को रोकना है।

आधार कार्ड पहचान है, नागरिकता का प्रमाण नहीं

वकील अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर करके आधार नियमों में बड़े बदलाव की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देने की अपील की है। याचिका के अनुसार, सभी सामान्य सेवा केंद्रों पर बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाने चाहिए। इन बोर्ड पर यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि बारह अंकों का आधार केवल पहचान का प्रमाण है। यह किसी भी व्यक्ति की नागरिकता, पते या जन्म तिथि का कोई पुख्ता प्रमाण बिल्कुल नहीं है।

घुसपैठिए उठा रहे हैं कमजोर सत्यापन का फायदा

यह पूरी याचिका देश की सुरक्षा और पहचान से जुड़ी एक बड़ी खामी को उजागर करती है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि घुसपैठिए वर्तमान सत्यापन प्रक्रिया की कमजोरी का पूरा फायदा उठा रहे हैं। वे भारतीय नागरिक की श्रेणी में आवेदन करके आसानी से अपना आधार बनवा लेते हैं। विदेशी नागरिक होने के बावजूद वे सिस्टम में हेरफेर करते हैं। यह स्थिति देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा बन चुकी है।

फर्जी दस्तावेजों से देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

एक बार आधार कार्ड बन जाने के बाद घुसपैठियों का रास्ता साफ हो जाता है। वे इसके आधार पर बहुत आसानी से राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र हासिल कर लेते हैं। इसके अलावा वे निवास प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लेते हैं। इन सभी सरकारी दस्तावेजों के बन जाने से असली और नकली नागरिकों के बीच फर्क करना लगभग असंभव हो जाता है। अब देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसले पर हैं।

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