Himachal News: हिमाचल प्रदेश के देहरा पुलिस जिले ने नशा तस्करों के विरुद्ध एक बड़ी और निर्णायक सर्जिकल स्ट्राइक की है। “नशा मुक्त हिमाचल अभियान” के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने करीब 39.48 लाख रुपये की अवैध संपत्ति को फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अमल में लाई गई है। सक्षम प्राधिकारी, नई दिल्ली के आदेश पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 68(एफ) के तहत तस्कर की संपत्ति पर ताला लगाया गया है।
तस्कर शरीफ दीन का आवासीय भवन और भूमि सीज
पुलिस अधीक्षक मयंक चौधरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि खुंडियां तहसील के बलाहर निवासी 47 वर्षीय शरीफ दीन को इस कार्रवाई में लक्षित किया गया है। तस्कर की कुल 14.09 लाख रुपये मूल्य की भूमि और उस पर बने आवासीय भवन को फ्रीज किया गया है। यह संपत्ति खसरा नंबर 1819 पर स्थित है, जिसका कुल क्षेत्रफल 0-01-35 हेक्टेयर है। पुलिस ने आरोपी की काली कमाई से अर्जित हर निवेश को बारीकी से चिन्हित कर उसे सरकारी नियंत्रण में लिया है।
चार आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है आरोपी
पुलिस की गहन जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि शरीफ दीन लंबे समय से नशे के अवैध नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोपी के खिलाफ पहले से ही चार गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चरस बरामदगी जैसे एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे भी शामिल हैं। आरोपी ने मादक पदार्थों की तस्करी से भारी धन अर्जित किया और उससे संपत्तियों का निर्माण किया। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन की भी गहनता से जांच कर रही है।
देहरा पुलिस की दूसरी बड़ी वित्तीय कार्रवाई
एसपी देहरा ने जानकारी दी कि जिले में यह दूसरी बड़ी वित्तीय कार्रवाई है। इससे पहले पुलिस ने एक अन्य मामले में करीब 25.38 लाख रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की थी। अब तक कुल मिलाकर लगभग 39.48 लाख रुपये की संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं। पुलिस का लक्ष्य तस्करों को केवल सलाखों के पीछे भेजना नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक जड़ों को पूरी तरह काटना है। इससे संगठित अपराध और नशे की तस्करी पर प्रभावी लगाम लगेगी।
नशा माफियाओं के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
हिमाचल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नशा माफियाओं के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को चिन्हित करने के लिए पुलिस एक विशेष डेटाबेस तैयार कर रही है। पुलिस विभाग स्थानीय जनता से भी अपील कर रहा है कि वे नशे के कारोबारियों की जानकारी साझा करें। विभाग का मानना है कि तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने से ही राज्य को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सकता है।


