Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा ढांचे में बड़ा फेरबदल करने जा रही है। पांच से कम विद्यार्थियों वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को अब नजदीकी संस्थानों में मर्ज या डाउनग्रेड किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मंजूरी के लिए भेज दिया है। पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही कैबिनेट की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके साथ ही कम नामांकन वाले कॉलेजों पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़ा फैसला
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्य सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए इस योजना की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांच से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को समायोजित करने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। सरकार चाहती है कि उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। कम नामांकन वाले स्कूलों में शैक्षणिक माहौल की कमी को देखते हुए प्रशासन अब संसाधनों के युक्तिकरण (Rationalization) पर विशेष ध्यान दे रहा है।
शून्य नामांकन वाले स्कूलों पर पहले ही हो चुका है एक्शन
हिमाचल सरकार पहले ही कम या शून्य छात्र संख्या वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपना चुकी है। बीते अप्रैल माह में शून्य नामांकन वाले 24 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद किया गया था। इससे पहले 27 मार्च को भी राज्य के 36 प्राइमरी स्कूलों पर ताला लटकाया गया था। नए शैक्षणिक सत्र में बहुत कम दाखिले होने के कारण अब विभाग दूसरे चरण की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे राज्य के बजट और जनशक्ति का सही प्रबंधन होगा।
75 से कम विद्यार्थी होने पर बंद होंगे 11 कॉलेज
सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने उन 11 कॉलेजों को चिन्हित किया है जहां विद्यार्थियों की कुल संख्या 75 से कम है। चालू शैक्षणिक सत्र की दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन कॉलेजों को या तो बंद किया जाएगा या इनकी व्यवस्था बदली जाएगी। सरकार का तर्क है कि बहुत कम संख्या वाले संस्थानों को चलाने से प्रशासनिक और वित्तीय बोझ अनावश्यक रूप से बढ़ता है।
मुख्यमंत्री की मंजूरी और कैबिनेट फैसले का इंतजार
शिक्षा विभाग ने स्कूलों और कॉलेजों के विलय एवं बंदी का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। फिलहाल राज्य में चुनावी आदर्श आचार संहिता के कारण बड़े नीतिगत फैसलों पर रोक है। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही होने वाली कैबिनेट की पहली बैठक में इन संस्थानों के भविष्य पर निर्णायक फैसला लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शैक्षणिक सत्र के मध्य में ही संसाधनों को बेहतर ढंग से वितरित करना है ताकि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।


