Himachal News: हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका खोज निकाला है। जालसाज अब टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) और नामी टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारी बनकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। उपभोक्ताओं को कॉल करके डराया जाता है कि उनके नंबर से अवैध या अश्लील संदेश भेजे गए हैं। इस कारण उनका मोबाइल नंबर तुरंत ब्लॉक किया जा रहा है और पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज हो चुकी है।
डर का फायदा उठाकर हासिल कर रहे निजी जानकारी
जालसाज उपभोक्ताओं की घबराहट का लाभ उठाते हैं। वे नंबर बचाने के नाम पर बैंक विवरण और व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं। ठग खुद को ट्राई अधिकारी बताकर लोगों को सिम कार्ड अपडेट करने या 4G से 5G में अपग्रेड करने का प्रलोभन भी देते हैं। इसके लिए मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या फोन को रिबूट करने का निर्देश दिया जाता है। मंडी के व्यवसायी जोगिंदर सिंह ने सूझबूझ दिखाई और इस ठगी के जाल में फंसने से बच गए।
ट्राई ने दी सफाई: हम कभी नहीं करते ऐसी कॉल
बढ़ते मामलों को देखते हुए ट्राई ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। नियामक संस्था ने साफ किया है कि वह किसी भी व्यक्तिगत उपभोक्ता को कॉल करके नंबर ब्लॉक करने की चेतावनी नहीं देती है। ट्राई के पास नंबर बंद करने या एफआईआर दर्ज कराने का कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह से एक संगठित साइबर अपराध है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे किसी भी कॉल को आधिकारिक न मानें और तुरंत फोन काट दें।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने लोगों से की अपील
हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी ने जनता से सतर्क रहने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि लोग ऐसे फर्जी कॉल या संदेशों से बिल्कुल न घबराएं। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या आधार कार्ड जैसे दस्तावेज साझा न करें। यदि कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताता है, तो उसकी बातों पर आंख बंद करके विश्वास न करें। पुलिस विभाग साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सर्विलांस की मदद ले रहा है।
शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 का करें उपयोग
साइबर अपराध का शिकार होने पर या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। पीड़ित व्यक्ति नजदीकी साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। समय पर दी गई जानकारी से ठगी गई रकम को फ्रीज करने में मदद मिल सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही अपराधियों से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है। डिजिटल युग में सतर्कता बहुत जरूरी है।


