Himachal News: न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरा की अदालत ने बुजुर्ग महिला पर जानलेवा हमला करने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी महिन्द्र को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी रक्कड़ क्षेत्र के जिला कांगड़ा का निवासी है। कोर्ट ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत भारी जुर्माना भी लगाया है। यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और उस पर हुए बर्बर हमले से जुड़ा है, जिस पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है।
विभिन्न धाराओं के तहत लगा जुर्माना और कारावास
न्यायालय ने दोषी महिन्द्र पर आईपीसी की धारा 307 के तहत 10 वर्ष की जेल और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अतिरिक्त, धारा 452 के तहत उसे 7 वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा मिली है। अदालत ने धारा 323, 504 और 506 के अंतर्गत भी दंड निर्धारित किया है। साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपी ने जानबूझकर पीड़ित महिला को गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाई थी। कानून विशेषज्ञों ने इस सजा को समाज के लिए कड़ा संदेश बताया है।
85 वर्षीय माया देवी पर किया था जानलेवा हमला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 19 मार्च 2024 को घटित हुई थी। आरोपी महिन्द्र ने अपने पड़ोस में रहने वाली 85 वर्षीय बुजुर्ग माया देवी के सिर पर घातक प्रहार किया था। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। बुजुर्ग महिला की असहाय स्थिति के बावजूद आरोपी ने उन पर हमला करने में कोई संकोच नहीं किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया था।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मिली सजा
वारदात के तुरंत बाद पीड़िता की बहू निर्मला देवी ने रक्कड़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की गहनता से जांच की। जांच टीम ने घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए और चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को जघन्य अपराध का दोषी पाया। साक्ष्यों की मजबूती ने आरोपी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
समाज में बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर संदेश
देहरा अदालत का यह फैसला समाज में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जजों ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बुजुर्गों पर हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रक्कड़ पुलिस की सक्रियता और न्यायालय के त्वरित फैसले की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। दोषी को अब अपनी सजा काटने के लिए जेल भेज दिया गया है। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा है।


