Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का जनता से जुड़ने का सादगी भरा अंदाज बुधवार को एक बार फिर चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ से प्रदेश सचिवालय के लिए पैदल ही रवाना हुए। इस दौरान उन्होंने रास्ते में स्कूली छात्राओं और स्थानीय लोगों से आत्मीय संवाद किया। सीएम ने शिमला शहर में चल रहे विभिन्न विकासात्मक कार्यों का मौके पर जायजा भी लिया। उनका यह पैदल सफर जन-सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
छात्राओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
सचिवालय जाते समय मुख्यमंत्री ने स्कूली छात्राओं से बात कर उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जाना। छात्राओं ने आईएएस और आईपीएस बनने की अपनी इच्छा साझा की। इस पर सीएम सुक्खू ने कहा कि यदि एक सरकारी स्कूल में पढ़ा बच्चा मुख्यमंत्री बन सकता है, तो वे भी कड़ी मेहनत से बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। जब कुछ छात्राओं ने उनके पैर छूने चाहे, तो उन्होंने सहृदयता से उन्हें रोकते हुए कहा कि कन्याएं पैर नहीं छूती हैं।
145 करोड़ के यूटिलिटी डक्ट प्रोजेक्ट का निरीक्षण
पैदल भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने शिमला में निर्माणाधीन ‘यूटिलिटी डक्ट’ प्रोजेक्ट की प्रगति का सूक्ष्म निरीक्षण किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 145 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह सात किलोमीटर लंबा डक्ट छोटा शिमला से विलीज पार्क और सचिवालय होते हुए ओक ओवर तक बनाया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से बिजली की तारें और पानी की पाइपलाइनें पूरी तरह भूमिगत हो जाएंगी। इससे राजधानी शिमला के सौंदर्यीकरण को एक नया आयाम मिलेगा और केबलों का जाल खत्म होगा।
जनता की समस्याएं और विकास की जमीनी हकीकत
मुख्यमंत्री सुक्खू की यह पुरानी आदत रही है कि वे अक्सर सुरक्षा प्रोटोकॉल छोड़कर आम लोगों के बीच पहुंच जाते हैं। वह ओक ओवर से सचिवालय या रिज मैदान तक का सफर पैदल तय करना पसंद करते हैं। इस दौरान वे न केवल पर्यटकों और स्थानीय जनता की समस्याएं सुनते हैं, बल्कि विकास कार्यों की जमीनी हकीकत भी स्वयं परखते हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि सीधे संवाद से प्रशासन में पारदर्शिता आती है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है।
राजधानी के सौंदर्यीकरण पर विशेष जोर
शिमला को एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रुचि ले रहे हैं। यूटिलिटी डक्ट के साथ-साथ शहर के अन्य बुनियादी ढांचों को आधुनिक बनाने के निर्देश उन्होंने अधिकारियों को दिए हैं। पैदल यात्रा के दौरान उन्होंने नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के कार्यों की गुणवत्ता पर भी नजर रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर को तारों के झंझट से मुक्त करना उनकी प्राथमिकता है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि शिमला की प्राकृतिक सुंदरता भी निखरेगी।

