बरगी क्रूज हादसा: एमपी पर्यटन की बड़ी लापरवाही, मासूमों और पर्यटकों की जान से खिलवाड़

Jabalpur News: मध्य प्रदेश के बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज हादसे ने पर्यटन निगम की सुरक्षा व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि क्रूज संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था। चश्मदीदों और वीडियो के अनुसार, हादसे के वक्त अधिकांश पर्यटकों के पास लाइफ जैकेट तक नहीं थे। संचार तंत्र पूरी तरह फेल रहा, जिसके कारण संकट में फंसे लोगों को समय पर मदद नहीं मिल सकी।

गाइडलाइन को ताक पर रखकर हो रहा था संचालन

वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए तय नियमों के अनुसार, क्रूज संचालन के समय एक समर्पित रेस्क्यू टीम का अलर्ट मोड पर रहना अनिवार्य है। बरगी हादसे के दौरान ऐसी कोई भी टीम मौके पर मौजूद नहीं थी। पर्यटन निगम के सलाहकार राजेंद्र निगम ने दावा किया कि पर्याप्त जैकेट उपलब्ध थे, लेकिन इंटरनेट पर वायरल वीडियो हकीकत बयां कर रहे हैं। वीडियो में लोग पानी भरने के बाद घबराहट में लाइफ जैकेट ढूंढते और पहनते नजर आ रहे हैं।

मासूमों के लिए नहीं थे सही साइज के सुरक्षा उपकरण

सुरक्षा मानकों में सबसे बड़ी खामी लाइफ जैकेट की उपलब्धता और उनके साइज को लेकर दिखी है। दिल्ली से आए एक परिवार की दुखद कहानी ने सबको झकझोर दिया, जहां एक मां ने अपने मासूम बेटे के लिए लाइफ जैकेट न होने पर उसे सीने से चिपका लिया था। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स (NIWS) के अनुसार, सवारी शुरू करने से पहले जैकेट पहनना अनिवार्य है, लेकिन बरगी में पर्यटकों को बिना सुरक्षा के ही सफर पर ले जाया गया।

प्रमाण पत्रों और ट्रेनिंग को लेकर भी उठे सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि वाटर स्पोर्ट्स में लगे अधिकांश कर्मचारियों के पास वैध योग्यता प्रमाण पत्र नहीं थे। NIWS के नियमों के मुताबिक, कर्मियों के पास लाइफ सेविंग तकनीक और सीपीआर की ट्रेनिंग होनी चाहिए। हकीकत यह है कि मौके पर न तो पर्याप्त स्टाफ था और न ही फर्स्ट एड की सुविधा। कई कर्मचारियों के सर्टिफिकेट की वैधता भी खत्म हो चुकी थी, जिसे समय रहते रिन्यू नहीं कराया गया था।

रेस्क्यू टीम की गैर-मौजूदगी ने बढ़ाया मौत का आंकड़ा

नियम कहते हैं कि संचालन के दौरान एक पावरफुल रेस्क्यू बोट हमेशा स्टैंडबाय मोड पर होनी चाहिए, जिसका इस्तेमाल किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकता। बरगी में न तो कोई निगरानी करने वाला मौजूद था और न ही रेस्क्यू के पुख्ता इंतजाम थे। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि क्रूज का संचालन शाम छह बजे के बाद भी जारी था, जबकि नियमों के अनुसार इसे केवल दिन की रोशनी में ही चलाया जा सकता है।

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