Bengaluru News: भारत की सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘गैलेक्सआई’ (GalaxEye) का ‘मिशन दृष्टि’ उपग्रह एक क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है। ऑप्टोसार (OptoSAR) तकनीक से लैस यह दुनिया का पहला ऐसा उपग्रह है, जो घने बादलों और रात के गहरे अंधेरे में भी दुश्मन की सटीक टोह ले सकेगा। चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच, यह स्वदेशी उपग्रह भारतीय सेना को रियल टाइम में डेढ़ मीटर के दायरे तक की बारीक जानकारी प्रदान करेगा।
विदेशी निर्भरता खत्म: अब अमेरिका से नहीं मांगनी होगी तस्वीरें
अतीत में भारत को सीमा पार की सैन्य गतिविधियों और आतंकी अड्डों की क्षति का आकलन करने के लिए अमेरिकी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में हुए नुकसान की तस्वीरें समय पर न मिल पाने और अमेरिकी पाबंदियों ने भारत के लिए चुनौतियां खड़ी की थीं। लेकिन अब गैलेक्सआई के इस ऐतिहासिक मिशन के बाद भारत को किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं होगी। भारतीय सेना अब स्वतंत्र रूप से बादलों और अंधेरे को चीरकर साफ तस्वीरें हासिल कर सकेगी।
IIT मद्रास के छात्रों का कमाल: 5 साल में रचा इतिहास
इस गौरवशाली मिशन की नींव साल 2021 में IIT मद्रास के प्रतिभावान छात्रों ने रखी थी। कंपनी के संस्थापक और सीईओ सुयश सिंह के नेतृत्व में इस स्टार्टअप ने महज पांच साल के भीतर वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियां भी नहीं कर सकीं। यह देश का पहला ऐसा अंतरिक्ष कार्यक्रम है जिसने दुनिया का सबसे अनोखा उपग्रह लॉन्च करने में सफलता पाई है। यह स्टार्टअप अब भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
उष्णकटिबंधीय मौसम की बाधाएं अब होंगी दूर
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में साल के अधिकांश समय घने बादल छाए रहते हैं, जिससे सामान्य ऑप्टिकल कैमरे अंतरिक्ष से जमीन की निगरानी नहीं कर पाते। मिशन दृष्टि का उन्नत रडार सिस्टम इसी समस्या का समाधान है, जो मौसम की परवाह किए बिना हाई-रेसोल्यूशन तस्वीरें लेता है। सुयश सिंह के अनुसार, अब चीन और पाकिस्तान की सीमाओं की निगरानी और सटीक ‘बम डैमेज असेसमेंट’ के लिए विदेशी वाणिज्यिक उपग्रहों पर करोड़ों खर्च करने और इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

