Bihar News: बिहार में नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मंत्रियों की सूची पर सहमति ले ली है। केवल आधिकारिक घोषणा होना शेष है। कई राज्यों के चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख तय की जाएगी। मंत्रिमंडल में कुछ नए युवाओं को जगह मिलेगी, जबकि ज्यादातर पुराने चेहरे बरकरार रहेंगे।
शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय मंत्रियों से अहम मुलाकात
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अहम मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने निर्मला सीतारमण, अश्विनी वैष्णव, ललन सिंह और जीतनराम मांझी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी विशेष चर्चा की। पंद्रह अप्रैल को राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी की यह सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल मानी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पटना में चर्चा
दिल्ली के इस महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बहुत लंबी बातचीत की थी। इस अहम बैठक में प्रदेश के दोनों सबसे बड़े राजनीतिक दलों के बीच मंत्री पदों और विभागों के बंटवारे पर शुरुआती सहमति बन गई थी। नई सरकार में अभी विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव उपमुख्यमंत्री के रूप में अपना काम कर रहे हैं।
विधानसभा में मंत्रियों की कुल संख्या का फॉर्मूला
बिहार विधानसभा के नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री को मिलाकर अधिकतम छत्तीस मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस बार मंत्रियों की संख्या का फॉर्मूला लगभग पहले जैसा ही रखा जाएगा। पुराने फॉर्मूले के तहत भाजपा और जदयू दोनों को पंद्रह-पंद्रह मंत्री पद दिए जाएंगे। इसके अलावा सरकार में शामिल सहयोगी दलों लोजपा को दो और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा तथा राष्ट्रीय लोकमोर्चा को एक-एक मंत्री पद दिया जाएगा। इससे राजनीतिक गठबंधन और मजबूत होगा।
पहले चरण में शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या
शुरुआती चरण में मंत्री पद के सभी खाली स्थानों को एक साथ नहीं भरा जाएगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पहले चरण में भाजपा से तेरह और जदयू से बारह नए मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण पद खाली रखे जाएंगे। विभागों में बहुत ही सीमित फेरबदल होने की संभावना है। नए चेहरों को शामिल करके भविष्य की राजनीति तैयार होगी।
नए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन और महिला भागीदारी
इस मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का बहुत खास ध्यान रखा जाएगा। अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में बनाए रखना राज्य में राजनीतिक स्थिरता का एक बड़ा संकेत देगा। इसके अलावा नई सरकार में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने पर भी पूरा जोर दिया जा सकता है। नए विभागों के सही बंटवारे से ही राज्य में प्रशासनिक कार्यों की तेज गति और बिल्कुल सही दिशा तय होगी।


