Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं से भरवाए गए 1500 रुपये के फॉर्म धूल फांक रहे हैं। चुनाव के समय कांग्रेस ने 18 से 59 वर्ष की महिलाओं को आर्थिक मदद की गारंटी दी थी। साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी एक भी किस्त जारी नहीं हुई। विपक्ष के नेता ने सरकार से इन फॉर्म्स का स्टेटस सार्वजनिक करने की मांग की है।
महिलाओं के हक पर कांग्रेस की खामोशी
शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ‘प्यारी बहना सुख सम्मान निधि’ की घोषणा की थी। इस योजना के लिए प्रदेश की लगभग 10 लाख महिलाओं ने आवेदन किया था। महिलाओं ने जरूरी दस्तावेज बनवाने में अपना समय और कीमती पैसा भी खर्च किया। दो साल बीतने के बाद भी उन आवेदनों का कोई पता नहीं है। आज प्रदेश की नारी शक्ति अपने हक और उन फॉर्म्स की स्थिति के बारे में सवाल पूछ रही है।
बकाया किस्तों पर घेरा
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार को बने 42 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। नियम के अनुसार हर पात्र महिला पर सरकार की 42 किस्तें बकाया हैं। मुख्यमंत्री ने मनाली और सुलह में मंच से अप्रैल महीने से पैसा देने का वादा किया था। अब मई का महीना भी बीत रहा है, लेकिन खातों में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। कांग्रेस सरकार केवल झूठे वादे करके जनता को गुमराह कर रही है। जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है।
पुरानी जन कल्याणकारी योजनाएं हुई ठप्प
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं को सम्मान देने के बजाय उनके अधिकार छीन रही है। उन्होंने दावा किया कि बेटियों के सशक्तिकरण के लिए जारी ‘बेटी है अनमोल’ योजना बंद कर दी गई है। इसके अलावा गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए मददगार ‘शगुन’ और ‘कन्यादान’ जैसी योजनाएं भी अब ठप्प पड़ी हैं। भाजपा सरकार के समय शुरू हुई इन योजनाओं को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे प्रदेश की नारी शक्ति में सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
अपमान का बदला लेगी नारी शक्ति
जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ऐतिहासिक कानून लाए, तब कांग्रेस ने अड़ंगे लगाए। सम्मान निधि के नाम पर वोट लेकर महिलाओं को ठगा जा रहा है। नारी शक्ति अपने इस अपमान को कभी सहन नहीं करेगी। आगामी समय में कांग्रेस को इस विश्वासघात का भारी खमियाजा भुगतना पड़ेगा। सरकार को अब जवाब देना होगा कि आखिर विकास और वादे कहां गायब हैं।


