होर्मुज के समुद्री चक्रव्यूह से निकला भारतीय जहाज ‘सर्व शक्ति’, रसोई गैस की किल्लत के बीच बड़ी राहत

New Delhi News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर आई है। रसोई गैस (LPG) से लदा भारतीय जहाज ‘सर्व शक्ति’ सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच गया है। वाशिंगटन की ओर से ईरानी जहाजों पर लगाई गई सख्त पाबंदियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से आवाजाही लगभग ठप थी। ऐसे में भारतीय जहाज का सुरक्षित निकलना देश के ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

45,000 टन एलपीजी लेकर विशाखापत्तनम आ रहा है जहाज

विशालकाय गैस टैंकर ‘सर्व शक्ति’ करीब 45,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज पर 18 भारतीयों समेत कुल 20 चालक दल के सदस्य सवार हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि यह 13 मई तक आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर पहुंच जाएगा। ईरान के लारक और केशम द्वीपों के पास से गुजरते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। फिलहाल यह जहाज ओमान की खाड़ी के सुरक्षित पानी में है और तेजी से अपने गंतव्य की ओर अग्रसर है।

सुरक्षा के लिए अपनाई गई खास ‘इंडियन आइडेंटिटी’ रणनीति

होर्मुज स्ट्रेट के खतरनाक रास्ते को पार करने के लिए सुरक्षा कारणों से जहाज की पहचान को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। जहाज ने खुद को ‘भारतीय चालक दल वाला और भारत की ओर जाने वाला’ घोषित किया। इस रणनीति का उद्देश्य संभावित खतरों और किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से बचना था। शिपिंग दस्तावेजों के अनुसार, इस गैस कार्गो का मुख्य खरीदार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने अभी तक इस संवेदनशील मसले पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

अमेरिका-ईरान जंग के बीच शून्य हुई थी जहाजों की संख्या

‘सर्व शक्ति’ की यह साहसी यात्रा उस दौर में हो रही है जब अमेरिकी नाकेबंदी के कारण होर्मुज मार्ग से व्यापारिक जहाजों का निकलना नामुमकिन सा हो गया था। पिछले महीने इस मार्ग को कुछ देर के लिए खोला गया था। लेकिन ईरानी सेना की गोलीबारी के बाद इसे सुरक्षा कारणों से फिर बंद कर दिया गया। इसी चुनौतीपूर्ण समय में ‘देश गरिमा’ नामक एक अन्य भारतीय जहाज भी यहां से निकलने में कामयाब रहा था। यह भारत की मजबूत समुद्री कूटनीति का ही परिणाम है।

देश में रसोई गैस की कमी और सरकार की कोशिशें

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के कारण भारत पर इस संकट का गहरा असर पड़ा है। मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने के कारण देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की भारी कमी देखी गई है। स्थिति को संभालने के लिए भारत सरकार ने ईरान के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की है। अब तक 8 एलपीजी जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली है। साथ ही घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन किया गया है ताकि संकट को टाला जा सके।

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