New Delhi News: केंद्र सरकार ने आधार कार्ड के प्रारूप में बदलाव की खबरों को पूरी तरह फर्जी बताया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि आधार को केवल फोटो और क्यूआर कोड तक सीमित किया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसे भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वहीं आज सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड से जुड़ी अहम याचिका पर सुनवाई होगी।
मंत्रालय ने अफवाहों को खारिज कर दी सख्त चेतावनी
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रविवार को महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया। मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें। नागरिकों को केवल भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करना चाहिए। केंद्र सरकार ने सभी मीडिया संगठनों से भी सख्त अपील की है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अप्रमाणित जानकारी को बिल्कुल बढ़ावा न दें, ताकि आम जनता के बीच बेवजह भ्रम न फैले।
देश में चौंतीस करोड़ से अधिक आधार उपयोगकर्ता
यह सरकारी स्पष्टीकरण उस महत्वपूर्ण समय आया है जब आधार कार्ड के बड़े पैमाने पर डिजाइन बदलने के दावों का ऑनलाइन प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। सरकार इस तरह की सभी फर्जी खबरों पर पूरी तरह लगाम लगाना चाहती है। वर्तमान समय में देश भर में लगभग एक सौ चौंतीस करोड़ से भी अधिक सक्रिय आधार उपयोगकर्ता मौजूद हैं। यूआईडीएआई ने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक सत्रह हजार करोड़ से अधिक सुरक्षित प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरा किया है।
सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के आधार पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट आज भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को निर्देश देने की मांग वाली एक बहुत अहम याचिका पर विशेष सुनवाई करेगा। यह याचिका सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची की पीठ के समक्ष विस्तार से सुनवाई के लिए आएगी। इस जनहित याचिका में अदालत से यह बड़ी मांग की गई है कि भविष्य में नए आधार कार्ड केवल छह वर्ष तक की आयु के छोटे बच्चों और नागरिकों को ही विशेष रूप से जारी किए जाएं।
वयस्कों के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाने की गुहार
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में किशोरों और वयस्कों के लिए पहचान पत्र जारी करने के सख्त दिशा-निर्देश बनाने की गुहार लगाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकों के रूप में देश में छिपने से पूरी तरह रोकना है। याचिकाकर्ता का मानना है कि कमजोर सत्यापन प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाकर कई घुसपैठिए बड़ी आसानी से अपना आधार बनवा रहे हैं। इस वजह से देश की आंतरिक सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा लगातार मंडरा रहा है।
सेवा केंद्रों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाने की विशेष मांग
वकील अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में एक और अहम मुद्दा बहुत प्रमुखता से उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को सभी सामान्य सेवा केंद्रों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाने का सीधा निर्देश देने की मांग की है। इन बोर्ड पर स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि बारह अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या केवल पहचान का एक प्रमाण है। इसे किसी भी परिस्थिति में नागरिकता, निवास स्थान या जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण बिल्कुल नहीं माना जा सकता है।


