Delhi News: बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें ‘इंजीनियर राशिद’ के नाम से जाना जाता है, को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें एम्स (AIIMS) में भर्ती अपने बीमार पिता से मिलने की अनुमति दे दी है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने अंतरिम जमानत की शर्तों में बदलाव किया है। अब राशिद को तिहाड़ जेल से रोजाना अस्पताल ले जाया जाएगा। वह सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक पिता के साथ रहेंगे।
श्रीनगर से दिल्ली एम्स शिफ्ट हुए बीमार पिता
राशिद इंजीनियर के पिता पहले श्रीनगर के एक अस्पताल में भर्ती थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली लाया गया और एम्स में भर्ती कराया गया। पहले राशिद को श्रीनगर में पिता के साथ रहने के लिए जमानत मिली थी। उनके वकील विख्यात ओबेरॉय ने कोर्ट को बताया कि राशिद श्रीनगर में फंसे हुए थे। पिता के दिल्ली शिफ्ट होने के कारण आदेश में बदलाव की सख्त जरूरत थी। अदालत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली।
अदालत ने लगाईं सख्त शर्तें, मोबाइल के इस्तेमाल की छूट
हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत 10 मई तक बढ़ा दी है। राशिद को अस्पताल में रहने के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है। हालांकि, वह अपने परिवार के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति से बात नहीं कर सकेंगे। सुरक्षा के लिए दो अधिकारी हमेशा उनके साथ रहेंगे, जिसका खर्च एनआईए (NIA) उठाएगी। अदालत ने राशिद को दिल्ली में रहने का एक निश्चित पता देने का भी निर्देश दिया है। वह शाम को वापस तिहाड़ जेल लौटेंगे।
NIA ने किया जमानत का विरोध, पर कोर्ट ने नहीं मानी दलील
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने राशिद की जमानत का पुरजोर विरोध किया। एजेंसी ने आशंका जताई कि बाहर आने पर सांसद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। एनआईए के वकील ने तर्क दिया कि एक गवाह पहले ही अपने बयान से पलट चुका है। एजेंसी ने केवल ‘कस्टडी पैरोल’ देने की सलाह दी थी। हालांकि, बेंच ने इस दलील को खारिज करते हुए अंतरिम जमानत को ही प्राथमिकता दी। अदालत ने माना कि एक सांसद के नाते मानवीय आधार पर उन्हें यह राहत मिलनी चाहिए।
टेरर फंडिंग मामले में 2019 से जेल में हैं राशिद
इंजीनियर राशिद अगस्त 2019 से टेरर फंडिंग के आरोपों में न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर एनआईए ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। निचली अदालत ने पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले उन्हें संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए भी विशेष अनुमति मिली थी। अब पिता की गंभीर बीमारी ने उन्हें एक बार फिर जेल की चारदीवारी से कुछ समय के लिए बाहर आने का मौका दिया है। उनके वकील अब इस राहत को विस्तार दिलाने की कोशिश में हैं।


