दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे ने बढ़ाई टेंशन: वीकेंड पर उमड़ रहा वाहनों का सैलाब, पुलिस के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट बनी चुनौती

Uttarakhand News: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद उत्तराखंड की राजधानी और पर्यटन स्थलों पर यातायात प्रबंधन एक विकराल समस्या बन गया है। वीकेंड शुरू होते ही मसूरी, देहरादून और ऋषिकेश की सड़कों पर वाहनों का दबाव सामान्य से दोगुना तक पहुंच रहा है। पर्यटन सीजन और छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में सैलानी उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं, जिससे पुलिस के लिए व्यवस्था संभालना बेहद कठिन हो गया है। प्रमुख चौराहों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है, जिससे यात्रियों को भीषण गर्मी में घंटों तक सड़क पर ही फंसे रहना पड़ रहा है।

एएनपीआर कैमरों के आंकड़ों ने चौंकाया

यातायात पुलिस द्वारा स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरों से जुटाए गए आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि सामान्य दिनों की तुलना में वीकेंड पर वाहनों का प्रवेश अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। जहां 29 अप्रैल को शहर में लगभग 25,432 वाहन दाखिल हुए थे, वहीं एक मई से शुरू हुए वीकेंड के दौरान यह संख्या बढ़कर 51,800 तक पहुंच गई। इनमें 35 हजार से अधिक छोटी कारें और हजारों की संख्या में दोपहिया वाहन शामिल थे, जिन्होंने मसूरी और ऋषिकेश की ओर प्रस्थान किया।

सीमित संसाधनों और पार्किंग की कमी से जूझती पुलिस

ट्रैफिक पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित मैनपावर और संसाधनों के बीच इस भारी भीड़ को नियंत्रित करना है। देहरादून-मसूरी मार्ग पर राजपुर रोड से लेकर किंग्रेग तक वाहनों की अंतहीन कतारें लग रही हैं। ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला और तपोवन क्षेत्र में भी हालात बेकाबू हो रहे हैं। पार्किंग स्थलों की भारी कमी के कारण पर्यटक सड़कों के किनारे ही वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे जाम की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। पुलिस को कई संवेदनशील स्थानों पर मजबूरन मैनुअल ट्रैफिक कंट्रोल करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों की बढ़ी मुसीबत

बाहरी वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण देहरादून के स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए घर से निकलने वाले लोगों को मुख्य मार्गों पर फंसना पड़ रहा है। स्थानीय जनता का समय और कार्य दोनों इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहे हैं। पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचने के साथ ही यह संकट और गहराने की आशंका है। नागरिक अब ट्रैफिक प्रबंधन को डिजिटल और अधिक आधुनिक बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि शहर के भीतर का आवागमन सुचारू बना रहे।

ट्रैफिक प्लान: अब सेक्टरों में बंटेगी ड्यूटियां

बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यातायात पुलिस ने अब एक नया मास्टर प्लान तैयार किया है। पुलिस अधीक्षक यातायात, लोकजीत सिंह के अनुसार, आशारोड़ी से लेकर मसूरी तक के पूरे रूट को अब अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। हर पांच किलोमीटर के दायरे को एक सेक्टर मानकर वहां एक सब इंस्पेक्टर और सिपाही की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। इन सभी सेक्टरों की निगरानी की जिम्मेदारी सीधे क्षेत्राधिकारी (CO) को सौंपी गई है। वीकेंड पर अतिरिक्त पुलिस बल को सड़क पर उतारने का निर्णय लिया गया है ताकि जाम की स्थिति से निपटा जा सके।

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