पुणे मासूम हत्याकांड: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत का खुलासा, महाराष्ट्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट और मौत की सजा का दिया आश्वासन

Pune News: पुणे के भोर तहसील में पिछले सप्ताह चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले में मंगलवार को चौंकाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची की मौत ‘दम घुटने’ (Asphyxia) के कारण हुई थी। पुलिस जांच में पता चला है कि 65 वर्षीय आरोपी भीमराव कांबले ने दुष्कर्म के दौरान बच्ची को चुप कराने के लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था, जिससे उसका दम घुट गया। पोस्टमार्टम में मासूम के शरीर पर चोट के कई गंभीर निशान भी पाए गए हैं।

आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास और घटना का वीभत्स विवरण

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पेशे से मजदूर है और उसका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ साल 1998 और 2015 में भी छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह बरी हो गया था। 1 मई को आरोपी ने मासूम को खाने का लालच देकर मवेशी बाड़े में बुलाया, जहां इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग पर भारी प्रदर्शन और एसआईटी का गठन

इस वीभत्स घटना के बाद समूचे पुणे जिले में भारी आक्रोश देखा गया। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने बच्ची का शव सड़क पर रखकर मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग जाम कर दिया, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। भोर और राजगढ़ तालुकों में बंद का आह्वान किया गया, जिसमें स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने आरोपी को फांसी देने की मांग की।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों का सख्त रुख, 2 सप्ताह में चार्जशीट के निर्देश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार आरोपी को मौत की सजा दिलाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दुष्कर्म के दोषियों के लिए पैरोल के नियम कड़े करने के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि 2 सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन आधार पर करने के लिए विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) की नियुक्ति के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

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