ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर बढ़ा विवाद: भाजपा ने ‘संवैधानिक ईशनिंदा’ बताया, 8 मई को समाप्त हो सकती है सदस्यता

West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक गतिरोध गहरा गया है। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली और साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश को जबरन प्रभावित किया गया है, जिसके कारण वह वर्तमान स्थिति में पद नहीं छोड़ेंगी।

भाजपा का ममता पर तीखा प्रहार: बताया ‘लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान’

ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे ‘लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला’ और ‘संवैधानिक ईशनिंदा’ करार दिया। पात्रा ने कहा कि हार स्वीकार करना और शांतिपूर्वक सत्ता का हस्तांतरण करना भारतीय लोकतंत्र की पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी खुद को संविधान से ऊपर समझ रही हैं, जो देश की लोकतांत्रिक संरचना के लिए एक खतरनाक उदाहरण साबित हो सकता है।

केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देकर भाजपा ने घेरा

संबित पात्रा ने हालिया चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हारने वाले मुख्यमंत्रियों ने शालीनता से राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने पिनराई विजयन और एमके स्टालिन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति अपरिहार्य नहीं होता। भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी का आचरण ऐसा है मानो संविधान और कानून केवल उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते हैं। पार्टी ने इसे जनादेश का खुला अनादर और तानाशाही पूर्ण रवैया बताया है।

8 मई को स्वतः समाप्त हो सकती है मुख्यमंत्री की सदस्यता

संवैधानिक विशेषज्ञों और भाजपा प्रवक्ताओं ने तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ममता बनर्जी भले ही स्वेच्छा से इस्तीफा न दें, लेकिन संवैधानिक नियमों के अनुसार 8 मई को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही वह स्वतः पदमुक्त हो जाएंगी। विधानसभा भंग होने के साथ ही उनकी सदन की सदस्यता और मुख्यमंत्री पद की वैधता समाप्त हो जाएगी। भाजपा ने इसे अंबेडकरवादी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की अवधारणा को बड़ी चुनौती है।

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