गंगा एक्सप्रेसवे पर नीलगाय की टक्कर से बड़ा हादसा: यूपीडा और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर रार

Amroha News: उत्तर प्रदेश के नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे पर वन्यजीवों के आने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र में एक नीलगाय के एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के कारण दो कारों की भीषण टक्कर हो गई, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। दोनों ही विभाग वन्यजीवों को रोकने की विफलता के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

लोकार्पण के तीन दिन बाद ही हादसा, सुरक्षा घेरे पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को लोकार्पण किए जाने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन तेजी से बढ़ा है। मेरठ से प्रयागराज के बीच 594 किमी लंबे इस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे जमीन से करीब छह मीटर ऊंचा है और सुरक्षा के लिए दोनों ओर डेढ़ मीटर ऊंची टिन की गार्डिंग लगाई गई है। इसके बावजूद, संचालन के तीसरे दिन ही नीलगाय के ट्रैक पर आने से गाजियाबाद और नोएडा के यात्री घायल हो गए और नीलगाय की भी मृत्यु हो गई।

निर्माणाधीन जन सुविधा केंद्र बना सुरक्षा में बड़ी चूक का कारण

जांच में यह बात सामने आई है कि अमरोहा के रुखालू गांव के पास बन रहा आधुनिक जन सुविधा केंद्र सुरक्षा में सेंध का कारण हो सकता है। यह केंद्र पांच हेक्टेयर में निर्माणाधीन है, जिसके चलते वहां फिलहाल सुरक्षा गार्डिंग पूरी तरह से नहीं लगी है। अधिकारियों का अनुमान है कि नीलगाय इसी खुले रास्ते से एक्सप्रेसवे पर चढ़ी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि नीलगाय छह फीट तक ऊंची छलांग लगा सकती है, जिससे मौजूदा गार्डिंग की ऊंचाई नाकाफी साबित हो रही है।

जिम्मेदारी को लेकर यूपीडा और वन विभाग के बीच तकरार

हादसे के बाद दोनों सरकारी विभागों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। यूपीडा के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार मोगा का कहना है कि वन्यजीवों को रोकने और उनकी निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी वन विभाग की है। दूसरी ओर, हसनपुर के क्षेत्रीय वनाधिकारी नरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बंदोबस्त और बाड़ लगाने का कार्य यूपीडा का है। उनका तर्क है कि वन विभाग के कर्मचारी 24 घंटे लाठी लेकर एक्सप्रेसवे की रखवाली नहीं कर सकते, इसलिए यूपीडा को पुख्ता तकनीकी समाधान ढूंढना चाहिए।
एक वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में, क्या आप मानते हैं कि एक्सप्रेसवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को फेंसिंग की ऊंचाई बढ़ाने के साथ-साथ ‘एनिमल ओवरपास’ जैसे आधुनिक समाधानों पर निवेश करना चाहिए?

Hot this week

Related News

Popular Categories