शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी की लहर, रुपये की ऐतिहासिक गिरावट के बीच निवेशकों ने किन शेयरों में लगाया दांव?

Mumbai News: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने आज सुबह के सत्र में हरे निशान के साथ शुरुआत की। यह तेजी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें चिंताजनक स्तर पर बनी हुई हैं। साथ ही, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को रुपये की कीमत पहली बार 95.7 के स्तर को पार कर गई थी।

बाजार में मिला-जुला रुख: मेटल और फार्मा शेयरों की चमक बढ़ी

दलाल स्ट्रीट पर आज निवेशकों का रुख काफी संतुलित और रणनीतिक नजर आ रहा है। मेटल, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखी जा रही है। इसके साथ ही केमिकल और मिडकैप सेगमेंट में भी निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक वर्तमान अनिश्चितता के दौर में डिफेंसिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर अधिक भरोसा जता रहे हैं। बाजार को बैंकिंग सेक्टर से भी काफी स्थिरता मिल रही है, जो फिलहाल मजबूती से डटा हुआ है।

आईटी और ऑटो सेक्टर में सुस्ती, निवेशकों ने अपनाई सतर्कता

एक तरफ जहां कुछ सेक्टर बाजार को सहारा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रोथ आधारित क्षेत्रों में दबाव साफ नजर आ रहा है। आईटी, रियल्टी, मीडिया और ऑटो सेक्टर के शेयरों में आज कमजोरी दर्ज की गई है। कंज्यूमर सेक्टर के प्रति भी बड़े निवेशकों का नजरिया फिलहाल काफी सतर्क बना हुआ है। बाजार में छाई इस सावधानी के पीछे वैश्विक आर्थिक संकेत और घरेलू मुद्रा की कमजोरी को मुख्य कारण माना जा रहा है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव: जापान गिरा, हांगकांग में उछाल

वैश्विक बाजारों की बात करें तो टोक्यो के समयानुसार सुबह 10:45 बजे तक एशियाई बाजारों में अलग-अलग रुझान दिखे। जापान का टॉपिक्स सूचकांक 0.4% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि ऑस्ट्रेलिया का मुख्य सूचकांक 0.2% नीचे रहा। दूसरी तरफ, हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में 1.1% की शानदार बढ़त दर्ज की गई। शंघाई कंपोजिट में भी 0.2% की मामूली गिरावट देखी गई। हालांकि, अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स मार्केट से अच्छे संकेत मिल रहे हैं, जो भारतीय बाजार को मजबूती दे सकते हैं।

कच्चा तेल और मुद्रा संकट ने बढ़ाई सरकार की चिंता

शेयर बाजार में हरियाली के बावजूद दो बड़े कारक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। पहला, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आयात बिल पर बोझ बढ़ा रही हैं। दूसरा, डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना विदेशी मुद्रा भंडार के लिए खतरे की घंटी है। बुधवार को रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.7 पर पहुंच गया था। इन विपरीत परिस्थितियों में भी शेयर बाजार का टिके रहना निवेशकों के अटूट भरोसे और घरेलू संस्थागत निवेश की ताकत को दर्शाता है।

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