North Korea News: प्योंगयांग ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का अहसास कराते हुए रविवार सुबह पूर्वी सिनपो क्षेत्र से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। उत्तर कोरिया के इन ताजा मिसाइल परीक्षणों ने प्रशांत क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। दक्षिण कोरियाई सेना ने इन प्रक्षेपणों की पुष्टि करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। इस साल यह सातवां अवसर है जब किम जोंग उन ने बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है। दक्षिण कोरिया और जापान ने अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हुए अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा है।
जापान और दक्षिण कोरिया में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम सक्रिय
उत्तर कोरिया की इन आक्रामक गतिविधियों के बाद टोक्यो और सियोल में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने तत्काल क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की बैठक बुलाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे समुद्र में मौजूद जहाजों और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएं। जापान ने उत्तर कोरिया के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। तीनों मित्र देश इस समय मिसाइलों की रेंज और उनकी मारक क्षमता का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं ताकि संभावित खतरे का सटीक आकलन किया जा सके।
ब्लैकआउट बम: किम जोंग उन का सबसे खतरनाक नया हथियार
उत्तर कोरिया ने बीते एक हफ्ते में केवल मिसाइलें ही नहीं बल्कि कई अत्याधुनिक हथियारों का परीक्षण किया है। किम जोंग उन ने व्यक्तिगत रूप से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और क्लस्टर बम वॉरहेड्स के परीक्षणों का निरीक्षण किया। इन हथियारों में सबसे घातक ‘कार्बन-फाइबर बम’ है जिसे ‘ब्लैकआउट बम’ के नाम से जाना जाता है। यह हथियार पावर प्लांट को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखता है। यह बम फटने के बाद कार्बन फाइबर के रेशों का जाल फैला देता है जिससे पूरे शहर का बिजली ग्रिड एक झटके में ठप हो सकता है।
परमाणु सक्षम सेना के आधुनिकीकरण की ओर बढ़ते कदम
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन लगातार परीक्षणों के पीछे किम जोंग उन की सेना को आधुनिक बनाने की बड़ी योजना है। वह अपने परमाणु सक्षम मिसाइल भंडार को न केवल बड़ा करना चाहते हैं बल्कि उसे अमेरिकी सुरक्षा कवच को भेदने के लायक बनाना चाहते हैं। दक्षिण कोरिया के लिए ये परीक्षण विशेष रूप से चिंताजनक हैं क्योंकि उत्तर कोरिया मोबाइल एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों का भी टेस्ट कर रहा है। किम जोंग उन का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वे कूटनीतिक बातचीत के बजाय अपनी सैन्य श्रेष्ठता स्थापित करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर
मिसाइल लॉन्च की इस नई श्रृंखला ने दक्षिण पूर्व एशिया में जारी तनाव को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है। अकेले अप्रैल महीने में ही उत्तर कोरिया चार बार हथियारों का परीक्षण कर चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन परीक्षणों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन मान रहा है। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, किम जोंग उन की मंशा पड़ोसी देशों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है। अगर परीक्षणों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो क्षेत्र में हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है, जिससे वैश्विक शांति पर गहरा संकट मंडराएगा।
