Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने बच्चों के हितों और उनके अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद पर बड़ी नियुक्ति की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनिता ठाकुर को इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बच्चों के कानूनी अधिकारों की प्रभावी निगरानी करना और बाल शोषण जैसे गंभीर मामलों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम के तहत हुई नियुक्ति
राज्य सरकार ने यह नियुक्ति बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 18 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है। अधिसूचना के मुताबिक, अनिता ठाकुर का कार्यकाल उनके कार्यभार संभालने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा। हालांकि, यदि वह इस अवधि के दौरान 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेती हैं, तो उनका कार्यकाल उसी समय समाप्त माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग के सुचारू संचालन के लिए नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
कौन हैं अनिता ठाकुर: एक अनुभवी राजनीतिक व्यक्तित्व
नवनियुक्त अध्यक्ष अनिता ठाकुर शिमला जिले के कोटखाई क्षेत्र से संबंध रखती हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रही हैं। वह हिमाचल प्रदेश महिला कांग्रेस में महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक विषयों पर गहरी पकड़ को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी है। राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को शासन में भागीदारी देने के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्य में बाल संरक्षण तंत्र को मिलेगी नई मजबूती
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का प्राथमिक कार्य बच्चों को मिलने वाले संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना है। यह आयोग बाल अधिकारों के उल्लंघन की जांच करने और बच्चों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव देता है। अनिता ठाकुर की नियुक्ति से उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग के लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बाल मजदूरी और शिक्षा के अधिकार जैसे मुद्दों पर आयोग अब और अधिक सक्रियता से जमीनी स्तर पर कार्य करेगा।
सामाजिक न्याय विभाग ने तय की भविष्य की रूपरेखा
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इस नियुक्ति के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिया है कि बच्चों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नवनियुक्त अध्यक्ष अब आयोग के सदस्यों के साथ मिलकर प्रदेश की बाल कल्याण योजनाओं की निगरानी करेंगी। आयोग की टीम यह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं लक्षित बच्चों तक पहुंचें। विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुभवी चेहरे के आने से आयोग की स्वायत्तता और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, जिससे हिमाचल में बाल अधिकारों का संरक्षण सुदृढ़ होगा।
