Himachal News: शिमला पुलिस ने नशे के खिलाफ बहुत बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने साढ़े तीन महीने में चिट्टा तस्करी के सौ मामले दर्ज किए हैं। इस बड़े अभियान में कुल 214 तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस केवल छोटी मछलियों को नहीं पकड़ रही है। बड़े नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में ठियोग में अदालत का एक कर्मचारी चिट्टा तस्करी में पकड़ा गया है।
एसएसपी गौरव सिंह के नेतृत्व में अंतरराज्यीय नेटवर्क ध्वस्त
शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने नशा माफिया की कमर तोड़ दी है। नौ फरवरी 2026 को कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया था कि नशे का खात्मा उनकी पहली प्राथमिकता है। पुलिस तकनीकी और नेटवर्क आधारित जांच कर रही है। बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर अब तक 38 मुख्य सप्लायर पकड़े गए हैं। पुलिस की विशेष टीमों ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक छापेमारी करके बड़े सरगनाओं को दबोचा है।
ठियोग में गुप्त सूचना पर पकड़ी गई बड़ी खेप
नशे के इस काले कारोबार में ठियोग पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। बारह अप्रैल को पुलिस को एक सटीक गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर नंगलदेवी के पास एक कार को रोका गया। तलाशी लेने पर नलेहा निवासी कुलदीप वर्मा के पास भारी मात्रा में चिट्टा मिला। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 8.340 ग्राम चिट्टा बरामद किया। मौके पर ही आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
व्हाट्सएप चैट और ऑनलाइन पेमेंट से खुला गहरा राज
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कुलदीप वर्मा उर्फ आशू से कड़ी पूछताछ की। आरोपी ने जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह बरामद चिट्टा हितेन्द्र मेहता नाम के व्यक्ति को सप्लाई करने जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने फोन और वित्तीय लेनदेन खंगाले। पुलिस को व्हाट्सएप चैट में नशे की खरीद से जुड़ी बातचीत मिल गई। हितेन्द्र मेहता द्वारा कुलदीप को किए गए ऑनलाइन भुगतान के पक्के सबूत भी हाथ लग गए।
अदालत का चपरासी निकला चिट्टे का मुख्य तस्कर
सबूत मिलने के बाद पुलिस ने मुख्य सरगना को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पुलिस ने फॉरवर्ड लिंकेज के आधार पर हितेन्द्र मेहता उर्फ रिंकू को 17 अप्रैल को धर दबोचा। जांच में पता चला कि हितेन्द्र वर्तमान में जेएमएफसी ठियोग में चपरासी के पद पर काम करता है। एक सरकारी कर्मचारी का नशे के कारोबार में शामिल होना बेहद गंभीर है। पुलिस ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 भी जोड़ दी है। आगे की कार्रवाई जारी है।
