हिमाचल वन विभाग में लाखों का घोटाला! ईको टूरिज्म के नाम पर पर्यटकों से अवैध वसूली, विजिलेंस करेगी जांच

Himachal News: हिमाचल प्रदेश वन विभाग में एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। ईको टूरिज्म के नाम पर लाखों रुपये की अवैध वसूली हुई है। यह गंभीर मामला शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र का है। एक गैर पंजीकृत कमेटी ने पर्यटकों से प्रवेश शुल्क लेकर रकम वसूली है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को सारे डिजिटल सबूत सौंप दिए हैं। पुलिस ने यह मामला विजिलेंस को भेज दिया है। सरकार ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

अधिकारियों के इशारे पर लाखों की वसूली

शिमला जिले के कंडयाली निवासी रणविजय सिंह ने पुलिस को अपनी शिकायत दी है। उन्होंने बताया कि ईको टूरिज्म मैनेजमेंट सोसायटी रामपुर के तहत अवैध वसूली चल रही थी। एक गैर पंजीकृत कमेटी ने पिछले तीन सालों में पर्यटकों से जमकर पैसा लूटा है। इस कमेटी ने कुल ग्यारह लाख इक्यावन हजार रुपये से अधिक की वसूली की है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि यह सब कुछ बड़े वन अधिकारियों के मौखिक आदेशों पर हुआ है।

मास्टरमाइंड के खिलाफ डिजिटल सबूत पेश

शिकायतकर्ता ने शिमला वन सर्किल के एक बड़े अधिकारी को इस घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया है। उन्होंने पुलिस को अवैध वसूली की कई रसीदें और पुख्ता डिजिटल साक्ष्य भी सौंपे हैं। भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों को देखते हुए कुमारसैन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरी शिकायत विजिलेंस विभाग को सौंप दी है। अब विजिलेंस टीम इस पूरे वित्तीय घोटाले की गहराई से जांच करेगी।

धमकी मिलने के बाद सरकार सख्त

रणविजय सिंह ने एक और बहुत ही गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें लगातार डरा और धमका रहे हैं। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां भी मिल रही हैं। वहीं वन एवं गृह सचिव कमलेश कुमार पंत ने बताया कि उन्हें मामले की शिकायत मिल गई है। उन्होंने प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर ही अगली कड़ी कार्रवाई होगी।

जांच रिपोर्ट का इंतजार, अधिकारी हैरान

वन विभाग के प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल संजय सूद ने भी इस मामले पर अपना बयान दिया है। उन्होंने मुख्य वन संरक्षक से पूरे प्रकरण की तुरंत रिपोर्ट मांगी है। सूद के अनुसार प्राथमिक बातचीत में अभी तक किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी इस भारी वसूली के दावों को लेकर पूरी तरह से हैरान हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली स्थिति साफ हो पाएगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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