Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक कॉलेज छात्रा की निर्मम हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस खौफनाक घटना के बाद माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं। बच्चों के कोमल मन पर आसपास की घटनाओं का बहुत गहरा असर पड़ता है। उन्हें सही और गलत की समझ देने में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। आज के समय में बच्चियों को मानसिक और शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत बनाने की सख्त जरूरत है।
खतरे का अहसास होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
अभिभावकों को अपनी बच्चियों को सशक्त बनाने की पहल खुद करनी होगी। बच्चियों को यह सिखाना बहुत जरूरी है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति उनका लगातार पीछा करे, तो वे तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसी स्थिति में उन्हें तुरंत अपने माता-पिता को पूरी बात बतानी चाहिए। अगर वे स्कूल या कॉलेज में पढ़ती हैं, तो शिक्षकों के ध्यान में भी यह मामला लाना चाहिए। टांडा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मेजर सुखजीत सिंह इस विषय पर खास सलाह देते हैं।
बच्चों को रोजाना समय दें और खुलकर बात करें
डॉक्टर सुखजीत के मुताबिक आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं। इसी वजह से बच्चे अपनी मर्जी से चीजें करने लगते हैं। हर माता-पिता को अपने बच्चों के लिए रोज कम से कम आधा घंटा जरूर निकालना चाहिए। शाम के समय पूरा परिवार एक साथ बैठे और दिनभर की गतिविधियों पर चर्चा करे। बच्चों से पूछें कि वे किससे मिले और उन्होंने क्या पढ़ा। बातों-बातों में उनकी छिपी हुई परेशानियों को समझने की कोशिश करें।
समाज के डर से बच्चों की गलतियां न छिपाएं
अकेलेपन के कारण अक्सर बच्चे गलत संगत का शिकार होते हैं। परेशानी तब बढ़ती है जब माता-पिता को इसकी भनक लग जाती है। लोग समाज में बेइज्जती के डर से बच्चों की नशे की बीमारी छिपाने लगते हैं। माता-पिता को ऐसा करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलकर बच्चे का सही उपचार करवाना चाहिए। कठिन समय में बच्चे के साथ मजबूती से खड़े रहना जरूरी है। इससे उसे अहसास होगा कि वह इस लड़ाई में बिलकुल भी अकेला नहीं है।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क
माता-पिता को बच्चों के व्यवहार पर हमेशा पैनी नजर रखनी चाहिए। कुछ खास लक्षण दिखने पर तुरंत सतर्क होना बहुत जरूरी है:
- जब बच्चा अचानक सबसे अलग और बिल्कुल अकेला रहना पसंद करने लगे।
- जब छोटी-छोटी बातों पर बच्चे का स्वभाव बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाए।
- जब बच्चा देर रात तक टीवी देखे और उसे ठीक से नींद न आए।
- जब बच्चे के अंदर अविश्वास की भावना पनपने लगे या वह गलत संगत में पड़े।
