Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई है। यहां कॉलेज जा रही होनहार छात्रा सिया गुलेरिया की दिनदहाड़े निर्मम हत्या कर दी गई। इस खौफनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक नशेड़ी युवक ने तेजधार हथियार से इस वारदात को अंजाम दिया। वह हत्या के तुरंत बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है। इस दर्दनाक घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भारी दहशत और गहरा आक्रोश है।
बस स्टॉप के पास घात लगाए बैठा था हत्यारा
सिया रोज की तरह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की उम्मीद लेकर घर से निकली थी। उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा। गोपालपुर कॉलेज में पढ़ने वाली यह छात्रा जब बस स्टॉप के करीब पहुंची, तो वहां पहले से घात लगाए बैठे रिशु ने उस पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। आरोपी रिशु एक नशेड़ी प्रवृत्ति का युवक है। उसने हथियार से उसकी जान ले ली।
पिता ट्रक चालक हैं, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दर्दनाक घटना ने एक हंसते-खेलते साधारण परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। सिया के पिता जोगिंद्र कुमार उर्फ अनु पेशे से एक ट्रक चालक हैं। वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए बद्दी में ट्रक चलाते हैं। सिया की एक बड़ी बहन प्रिया भी है, जो अपने पिता के साथ ही बद्दी में रहकर नौकरी करती है। वहीं, उसकी छोटी बहन मृदुला ने हाल ही में बारहवीं की परीक्षाएं दी हैं। परिवार सदमे में है।
कॉलेज में होनहार और राजनीति में सक्रिय थी छात्रा
सिया गोपालपुर कॉलेज में बीवॉक द्वितीय वर्ष की होनहार छात्रा थी। वह केवल पढ़ाई-लिखाई में ही नहीं, बल्कि कॉलेज की अन्य सभी छात्र गतिविधियों में भी हमेशा आगे रहती थी। राजनीति में भी उसकी गहरी रुचि थी। वह छात्र संगठन एसएफआई में इकाई उपाध्यक्ष के अहम पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थी। अपनी सहेलियों के बीच वह एक खुशमिजाज और सबको हंसाने वाली लड़की के रूप में जानी जाती थी। मौत से परिसर में सन्नाटा है।
शिक्षकों की थी चहेती, घर के कामों में भी देती थी हाथ
पढ़ाई के प्रति सिया का समर्पण बहुत गहरा था। वह नियमित रूप से कॉलेज आती थी। हर विषय का प्रोजेक्ट वह समय पर पूरा करती थी। अपने इसी अनुशासन के कारण वह कॉलेज के सभी शिक्षकों की भी बेहद चहेती थी। घर पर भी वह अपनी मां और बहन के साथ सारे घरेलू कामों में हाथ बंटाती थी। जिस दिन यह मनहूस घटना घटी, वह रोजमर्रा की तरह ही उत्साह से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।
