Business News: भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंच पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नए वित्तीय वर्ष के आंकड़े पुष्टि करते हैं कि चीन एक बार फिर अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। इस दौरान चीन के बाजारों में भारतीय सामानों की मांग में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह बदलाव न केवल व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे रहा है, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ अभियान की बढ़ती वैश्विक साख को भी मजबूती से दर्शा रहा है।
चीनी बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की भारी मांग
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में लगभग 37 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। भारत ने इस अवधि में चीन को 19.47 अरब डॉलर मूल्य का सामान भेजा है। यह वृद्धि बताती है कि चीन की कंपनियां और उपभोक्ता अब भारतीय उत्पादों पर पहले से कहीं अधिक भरोसा जता रहे हैं।
औद्योगिक विस्तार के लिए कच्चे माल का बढ़ता आयात
भारत इस समय अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नई फैक्ट्रियों की स्थापना और विनिर्माण क्षेत्र में तेजी के कारण मशीनों और कच्चे माल की जरूरत बढ़ी है। इसी मांग को पूरा करने के लिए भारत ने चीन से 131.63 अरब डॉलर की खरीदारी की है। विशेषज्ञ इसे सकारात्मक नजरिए से देख रहे हैं क्योंकि यह आयात देश के भीतर औद्योगिक क्रांति को गति देने और भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
अमेरिका के साथ व्यापार में भारत का दबदबा बरकरार
चीनी व्यापार में बढ़त के बावजूद, अमेरिका के साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता बेहद मुनाफे वाला बना हुआ है। भारत अमेरिका को निर्यात अधिक करता है और वहां से आयात कम करता है। इस रणनीतिक बढ़त के कारण भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में 34.4 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) प्राप्त हुआ है। भारत ने अमेरिकी बाजारों में 87.3 अरब डॉलर के उत्पाद बेचे हैं, जिसमें आईटी सेवाएं, फार्मास्युटिकल उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यात का बढ़ता दायरा
भारत की व्यापारिक धमक अब केवल चीन और अमेरिका तक सीमित नहीं है। वाणिज्य मंत्रालय की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, यूएई, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे विकसित देशों में भी भारतीय उत्पादों की पैठ बढ़ी है। इसके साथ ही ब्राजील, वियतनाम और नेपाल जैसे उभरते बाजारों में भी निर्यात के ग्राफ में सुधार हुआ है। यह विविधता दर्शाती है कि भारतीय उद्यमी और निर्यातक अब दुनिया के हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।
