India News: संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है। सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में अहम संशोधन पेश करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिलाओं का सच्चा सम्मान बताया है। इसके साथ ही सीटों का परिसीमन और लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी आएगा। वहीं विपक्ष ने परिसीमन पर सवाल उठाकर कड़े विरोध की चेतावनी दी है।
प्रधानमंत्री मोदी का महिलाओं को खास संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की विशेष कार्यवाही शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर एक अहम संदेश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश की माताओं और बहनों का सम्मान ही पूरे राष्ट्र का असली सम्मान है। सरकार नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक और मजबूत कदम उठा रही है। मोदी ने अपने संदेश में संस्कृत के एक श्लोक का भी जिक्र किया। यह श्लोक भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के तेज को बड़ी गहराई से दर्शाता है।
संसद भवन में दो हजार महिलाओं की विशेष मौजूदगी
इस ऐतिहासिक विधेयक की चर्चा को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए सरकार ने विशेष प्रबंध किए हैं। संसद भवन की विजिटर गैलरी में देश भर से करीब दो हजार महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। ये महिलाएं अलग-अलग राज्यों और विविध वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं। सभी महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में संसद पहुंचेंगी, जिससे देश की सांस्कृतिक विविधता साफ नजर आएगी। हर एक घंटे के अंतराल पर इन महिलाओं को संसदीय कार्यवाही देखने का खास मौका मिलेगा।
विपक्ष पर भाजपा का सीधा और तीखा हमला
सत्ता पक्ष ने महिला आरक्षण पर राजनीति करने के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लिया है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं से सिर्फ झूठे वादे किए हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी महिलाओं को उनके हक दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे। ठाकुर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना वादा निभाया है और भाजपा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विपक्षी दल अब भी महिलाओं के अधिकार रोकना चाहते हैं।
दक्षिण भारतीय राज्यों को लेकर भाजपा का स्पष्टीकरण
भाजपा ने कांग्रेस पर देश को जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर बांटने का गंभीर आरोप लगाया है। अनुराग ठाकुर ने विपक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दक्षिण भारतीय राज्यों में लोकसभा सीटें कम होने की आशंका जताई गई है। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ स्पष्ट किया कि इस परिसीमन से किसी भी राज्य का हक नहीं मारा जाएगा। किसी क्षेत्र की सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि सभी के साथ पूरा इंसाफ होगा।
परिसीमन प्रक्रिया पर राहुल गांधी के गंभीर सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सरकार की परिसीमन योजना पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा पर आगामी लोकसभा चुनावों से पहले सीटों के गणित में हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया है। राहुल गांधी का दावा है कि सरकार परिसीमन आयोग को अपने पूर्ण नियंत्रण में रखना चाहती है। उन्होंने असम और जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विपक्षी क्षेत्रों को बांटा गया था। उन्होंने भौगोलिक विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया है।
संसद में बहुमत का जटिल गणित और एनडीए की चुनौती
इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में विशेष बहुमत की सख्त जरूरत होगी। लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास वर्तमान में 293 सांसद हैं। वहीं विपक्षी गठबंधन के पास करीब 240 सांसदों का मजबूत समर्थन है। अगर सदन के सभी 543 सदस्य मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं, तो दो तिहाई बहुमत के लिए 364 वोटों की जरूरत पड़ेगी। इस स्थिति में सत्ता पक्ष को 71 अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा।
राज्यसभा में भी सरकार को अतिरिक्त समर्थन की दरकार
लोकसभा की ही तरह राज्यसभा में भी बहुमत जुटाना सरकार के लिए एक बड़ी और जटिल चुनौती साबित हो सकता है। उच्च सदन में एनडीए के पास फिलहाल 141 सदस्य मौजूद हैं। दूसरी तरफ विपक्ष के पास 62 सांसदों का ठोस समर्थन हासिल है। कुल 245 सदस्यों वाले इस सदन में विधेयक पारित कराने के लिए 164 वोटों का आंकड़ा छूना अनिवार्य है। सरकार अभी बहुमत से 23 वोट पीछे है और उसे विपक्षी सहयोग की सख्त जरूरत पड़ेगी।
रूल 66 को निलंबित करने की सरकारी रणनीति
संसद की कार्यवाही को तेज करने के लिए सरकार लोकसभा के रूल 66 को निलंबित करने की विशेष रणनीति बना रही है। यह अहम नियम परस्पर निर्भर विधेयकों को एक साथ पेश करने से रोकता है। सामान्य प्रक्रिया में ऐसे विधेयकों को सदन में अलग-अलग क्रमवार तरीके से पेश करना पड़ता है। सरकार का मुख्य मकसद समय बचाना और सभी जुड़े कानूनों को एक ही प्रस्ताव के जरिए तेजी से पारित कराना है। इससे विधायी प्रक्रिया में समय बचेगा।
कमल हासन ने विधेयक लागू करने में जल्दबाजी का किया विरोध
मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने भी महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर अपनी अहम प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक पार्टी महिलाओं के इस महत्वपूर्ण अधिकार का हमेशा से खुलकर समर्थन करती रही है। हालांकि उन्होंने चुनावी माहौल में इसे जल्दबाजी में लागू करने की सरकारी नीयत पर कड़े सवाल उठाए हैं। हासन का मानना है कि इसे सियासी फायदे का प्रलोभन नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके दूरगामी परिणामों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
देश की लोकतांत्रिक संरचना में एक बड़े बदलाव की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह प्रस्तावित संशोधन देश की संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा। अगर यह नया कानून सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो नीति निर्माण में आधी आबादी की सीधी और मजबूत भागीदारी आसानी से सुनिश्चित हो जाएगी। हालांकि परिसीमन का मुद्दा इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा कानूनी और सियासी पेंच फंसा सकता है। ऐसे में यह विशेष सत्र भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण सत्र होने वाला है।
