चम्बा के कुगती अभ्यारण्य में दिखा दुर्लभ हिमालयन ताहर, तस्वीरों ने दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों को चौंकाया

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले से पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर स्थित प्रसिद्ध कुगती वन्यजीव अभ्यारण्य में एक बेहद दुर्लभ नर हिमालयन ताहर देखा गया है। धरोल क्षेत्र की ऊंची और बेहद दुर्गम चट्टानों पर इस शानदार वन्यजीव को स्वतंत्र रूप से विचरण करते हुए कैमरे में कैद किया गया है। इसकी खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का सबसे बड़ा और सकारात्मक संकेत

कुगती के धरोल क्षेत्र में इस दुर्लभ हिमालयन ताहर का मिलना कोई आम बात नहीं है। वन्यजीव विशेषज्ञ इस घटना को क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक बहुत ही सकारात्मक और बड़ा संकेत मान रहे हैं। यह लुप्तप्राय जीव मुख्य रूप से हिमालय के उन ऊंचे इलाकों में रहता है, जहां इंसानों का पहुंचना मुश्किल होता है। इस शानदार जीव की उपस्थिति यह साफ साबित करती है कि विभाग के संरक्षण प्रयास धरातल पर सफल हो रहे हैं।

पहले भी इसी क्षेत्र में दिखी थी एक दुर्लभ सफेद एल्बिनो ताहर

कुगती वन्यजीव अभ्यारण्य का यह इलाका पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। इससे कुछ समय पहले धरौल बीट के थनारी गोठ में एक अत्यंत दुर्लभ सफेद मादा एल्बिनो हिमालयन ताहर दिखाई दी थी। वन्यजीवों की दुनिया में इस सफेद ताहर का दिखना एक असाधारण घटना मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयन ताहर की कुल आबादी के मात्र 0.05 प्रतिशत हिस्से में ही यह सफेद गुण पाया जाता है। यह जीव आमतौर पर गहरे भूरे रंग का होता है।

डीएफओ वन्य प्राणी ने जारी किया वन्यजीव सुरक्षा पर विशेष संदेश

इस दुर्लभ साइटिंग पर डीएफओ वन्य प्राणी चम्बा डॉक्टर कुलदीप जम्वाल ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने एक विशेष जागरूकता संदेश जारी करते हुए कहा कि हिमालयन ताहर हमारे प्राकृतिक ईको-सिस्टम का एक अनमोल हिस्सा है। डॉक्टर जम्वाल ने स्पष्ट किया कि इन दुर्लभ जीवों का संरक्षण करना केवल विभाग का काम नहीं है। यह पूरे समाज की एक सामूहिक जिम्मेदारी है। विभाग अब इस पूरे संवेदनशील क्षेत्र में अपनी निगरानी को और भी ज्यादा सख्त करने जा रहा है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विभाग ने जारी की सख्त हिदायत

वन्यजीव विभाग ने सभी पर्यटकों और ट्रैकर्स से एक खास अपील की है। विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि वे इन वन्यजीवों के बिल्कुल करीब न जाएं। लोग अक्सर अच्छी फोटो बनाने के लालच में इन जीवों को काफी परेशान करते हैं। डॉक्टर जम्वाल ने बताया कि प्राकृतिक आवास में दखल देने से जीवों को भारी मानसिक तनाव होता है। नियमों का ऐसा उल्लंघन करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है।

अवैध शिकार और संदिग्ध गतिविधियों पर रहेगी विभाग की बहुत पैनी नजर

वन विभाग ने स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका की भी जमकर सराहना की है। विभाग ने उन्हें शिकार जैसी किसी भी अवैध गतिविधि के खिलाफ हमेशा सतर्क रहने को कहा है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से आह्वान किया है कि वे संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए इन दुर्लभ जीवों का सुरक्षित रहना बहुत ही जरूरी है। इससे हमारी आने वाली पीढ़ियां भी हिमालय की इस खूबसूरत प्राकृतिक विरासत को देख सकेंगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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