India News: भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जल्द ही एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। महिला आरक्षण लागू करने की तैयारियों के बीच लोकसभा सीटों के परिसीमन की नई रूपरेखा सामने आई है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार लोकसभा में सांसदों की कुल संख्या 543 से बढ़कर सीधे 850 हो सकती है। अगर यह नया ड्राफ्ट लागू होता है तो पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे उत्तर भारतीय राज्यों की ताकत संसद में बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।
जनसंख्या के आधार पर तय होगा सीटों का नया गणित
केंद्र सरकार लोकसभा सीटों को बढ़ाने के लिए एक नए फॉर्मूले पर काम कर रही है। जानकारी के अनुसार सरकार परिसीमन के लिए 2026 की जनगणना का इंतजार नहीं करेगी। इसके बजाय 2011 की जनगणना को ही आधार बनाया जा सकता है। इस प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत देश की एक अरब बीस करोड़ की आबादी को 850 सीटों में बांटा जाएगा। इसके परिणामस्वरूप हर चौदह लाख लोगों की आबादी पर एक नया लोकसभा सांसद चुना जाएगा।
उत्तर प्रदेश 143 सीटों के साथ बनेगा असली ‘किंगमेकर’
नए परिसीमन फॉर्मूले का सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश को मिलेगा। बीस करोड़ आबादी वाले इस राज्य में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 143 तक पहुंच सकती हैं। संसद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी अभी 14.7 प्रतिशत है। बदलाव के बाद यह हिस्सेदारी बढ़कर 16.8 प्रतिशत हो जाएगी। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इतनी बड़ी संख्या किसी भी राजनीतिक दल के लिए केंद्र की सत्ता का रास्ता आसान या मुश्किल बना सकती है। यह राज्य भविष्य में निर्विवाद किंगमेकर बन जाएगा।
हरियाणा और पंजाब की लोकसभा सीटों में भारी उछाल
उत्तर भारत के राज्यों में सीटों का यह नया गणित काफी दिलचस्प है। हरियाणा की ढाई करोड़ आबादी के हिसाब से यहां लोकसभा सीटें 10 से बढ़कर 18 हो जाएंगी। इससे संसद में राज्य की हिस्सेदारी भी बढ़ जाएगी। वहीं दूसरी तरफ पंजाब की नुमाइंदगी भी 13 सीटों से बढ़कर 19 तक पहुंच सकती है। हालांकि सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद सदन में पंजाब की प्रतिशत हिस्सेदारी में पहले के मुकाबले मामूली सी कमी आ सकती है।
हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी दिखेगा बड़ा असर
मैदानी राज्यों के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में भी परिसीमन का साफ असर देखने को मिलेगा। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की लोकसभा सीटें मौजूदा 4 से बढ़कर 5 होने का मजबूत अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही देश के सीमावर्ती केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा। यहां लोकसभा सीटों की संख्या 5 से बढ़कर 9 तक हो सकती है। इन सभी बदलावों से उत्तर भारत की राजनीति और चुनाव प्रचार के तरीकों में भारी बदलाव आएगा।
आनुपातिक प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
परिसीमन योजना को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी विरोध शुरू हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह मॉडल उन राज्यों के लिए सजा है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। विपक्ष आनुपातिक प्रणाली लागू करने की मांग कर रहा है। वे चाहते हैं कि राज्यों की सीटों का प्रतिशत मौजूदा स्तर पर स्थिर रहे। आनुपातिक नियम के तहत पंजाब को 19 की जगह 20 और हिमाचल प्रदेश को 5 की जगह 6 लोकसभा सीटें मिलनी चाहिए।
