Business News: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भंडार एक मजबूत आर्थिक ढाल की तरह काम करता है। सेंट्रल बैंक के पास जमा इस खजाने में मुख्य रूप से डॉलर, येन, यूरो और सोना शामिल होता है। यह भंडार सिर्फ विदेशी मुद्राओं का साधारण संग्रह बिल्कुल नहीं है। यह संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान से बचाने वाला सबसे बड़ा हथियार है। इसी खजाने के दम पर देश अपनी आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।
मुद्रा को गिरने से बचाता है विदेशी भंडार
अगर किसी देश की घरेलू मुद्रा का मूल्य अचानक गिरने लगता है, तो यह विदेशी मुद्रा भंडार सबसे ज्यादा काम आता है। इस स्थिति में केंद्रीय बैंक बाजार में विदेशी मुद्रा बेचकर अपनी घरेलू मुद्रा को खरीदता है। ऐसा करने से घरेलू मुद्रा को जरूरी सहारा मिलता है। उदाहरण के लिए, जब भारतीय रुपये की कीमत में तेज गिरावट आती है, तो रिजर्व बैंक बाजार में अमेरिकी डॉलर बेचता है। इससे रुपये को स्थिर करने में मदद मिलती है।
भंडार कम होने पर बढ़ता है महंगाई का खतरा
इसके बिल्कुल विपरीत, जिन देशों के पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार नहीं होता, वे गंभीर आर्थिक खतरे में रहते हैं। ऐसे देशों की मुद्रा में हमेशा भारी अस्थिरता बनी रहती है। डॉलर की कमी के कारण आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में तेजी से महंगाई बढ़ने लगती है। इन सभी नकारात्मक परिणामों का सीधा असर देश के आम नागरिकों और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए हर देश इसे मजबूत रखता है।
दुनिया में सबसे ज्यादा खजाना किस देश के पास?
अब यह समझना बहुत आसान है कि केंद्रीय बैंक के पास विदेशी मुद्रा का भंडार होना कितना जरूरी है। इसका किसी भी देश के विकास पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। वर्तमान समय में दुनिया भर में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार चीन के पास मौजूद है। इस वैश्विक सूची में चीन लगातार पहले स्थान पर अपना दबदबा बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन की मजबूत पकड़ ही उसके इस विशाल खजाने का मुख्य कारण है।
विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में शीर्ष 5 देश
विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के शीर्ष पांच देशों की सूची इस प्रकार है:
- चीन लगभग $3,643,149 मिलियन के भंडार के साथ पहले स्थान पर है।
- जापान $1,394,750 मिलियन के भंडार के साथ दूसरे नंबर पर काबिज है।
- स्विट्जरलैंड $1,077,735 मिलियन के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है।
- रूस के पास कुल $755,400 मिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार है।
- भारत $688,058 मिलियन के साथ पांचवें नंबर पर है।
आखिर चीन के पास इतना खजाना कैसे आया?
चीन के पास इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जमा होने का एक खास कारण है। चीन का ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल अमेरिकी डॉलर में ही होता है। दुनियाभर में मौजूद चीनी कंपनियां अपनी कमाई डॉलर में करती हैं। बाद में वे इसे अपने घरेलू बैंकिंग चैनलों के जरिए चीनी मुद्रा में बदल लेती हैं। इसके परिणामस्वरूप ये सारे डॉलर चीन के सेंट्रल बैंक में लगातार जमा होते रहते हैं। इस भंडार का इस्तेमाल अमेरिकी प्रतिभूतियां खरीदने में होता है।
भारत की आर्थिक ताकत में हो रहा लगातार सुधार
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति में लगातार शानदार सुधार देखने को मिल रहा है। अगस्त 2025 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत के पास 688,058 मिलियन डॉलर का मजबूत भंडार मौजूद था। वहीं अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत का खजाना अब 697,120 मिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। इस भंडार से भारतीय रिजर्व बैंक को वैश्विक संकट के समय अर्थव्यवस्था सुरक्षित रखने में बहुत मदद मिलती है।
