India News: संसद के विशेष सत्र से पहले ही भारी सियासी बवाल मच गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्तावित कानून का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से विधेयक की प्रति जला दी है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ महिला आरक्षण का पूरा समर्थन कर रहा है। लेकिन विपक्ष परिसीमन की प्रक्रिया को पूरी तरह खारिज कर रहा है। एनडीए सरकार के लिए संसद में विशेष बहुमत साबित करना मुश्किल है। यह सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।
तमिलनाडु में परिसीमन बिल का उग्र विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक को ‘काला कानून’ बताया है। उन्होंने काले कपड़े पहनकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। स्टालिन ने सरेआम इस विधेयक की कॉपी को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार को इसके लिए सीधे तौर पर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह कानून तमिल लोगों को शरणार्थी बना देगा। सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्यों की आवाज को अगर अनसुना किया, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
विपक्षी गठबंधन की अहम रणनीति और बैठक
विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने संसद में सरकार को घेरने की ठोस रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी नेताओं की अहम बैठक हुई। इसमें तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कुल उन्नीस दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह महिला आरक्षण तुरंत लागू करने के पक्ष में है। लेकिन वह परिसीमन विधेयक का सदन के भीतर और बाहर पूरी ताकत से कड़ा विरोध करेगा।
संसद में एनडीए के लिए बहुमत का संकट
संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को विशेष बहुमत चाहिए। फिलहाल एनडीए के पास संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं है। लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को सरसठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। राज्यसभा में भी बहुमत साबित करने के लिए सत्ता पक्ष को इक्कीस सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में सरकार के लिए यह कानून पास कराना एक बड़ी और जटिल चुनौती बनता जा रहा है।
लोकसभा में आठ सौ पचास सीटों का प्रस्ताव
संसद के निचले सदन लोकसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या पांच सौ तैंतालीस है। इसे बढ़ाकर आठ सौ पचास करने का अहम प्रस्ताव सदन में रखा गया है। इसके साथ ही सरकार नया परिसीमन आयोग बनाने के लिए भी एक अलग विधेयक पेश कर रही है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संसद में मुख्य संविधान संशोधन विधेयक पेश करेंगे। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक सदन में रखेंगे।
दो हजार ग्यारह की जनगणना पर आधारित होगा परिसीमन
सरकार ने दो हजार ग्यारह की जनगणना के आधार पर परिसीमन का फैसला लिया है। नई जनगणना का इंतजार करने से समय पर परिसीमन का काम पूरा नहीं हो पाएगा। केंद्र सरकार महिला आरक्षण को दो हजार उनतीस के चुनावों में हर हाल में लागू करना चाहती है। इस कानून से अनुसूचित जाति और जनजाति की पहले से आरक्षित एक तिहाई सीटें महिलाओं को मिलेंगी। उसी वर्ग की महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होने से सभी को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
कैसा होगा नया परिसीमन आयोग का स्वरूप
नए परिसीमन विधेयक से सरकार एक स्वतंत्र आयोग बनाएगी। सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज इसके अध्यक्ष नियुक्त होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्यों के चुनाव आयुक्त इसके स्थायी सदस्य रहेंगे। आयोग की मदद के लिए प्रत्येक राज्य से पांच सांसद और पांच विधायक नामित किए जाएंगे। इन दस सदस्यों को बैठकों में मतदान करने या फैसलों पर हस्ताक्षर का अधिकार नहीं मिलेगा। यह नया आयोग नई व्यवस्था के तहत राज्यों में लोकसभा सीटों का आवंटन तय करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का नारी सशक्तिकरण पर जोर
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी सशक्तिकरण पर बयान दिया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि माताओं और बहनों का सम्मान ही पूरे राष्ट्र का असली सम्मान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का यह विशेष सत्र महिलाओं के हित में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। सरकार महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाने की दिशा में पूरी दृढ़ता के साथ लगातार आगे बढ़ रही है।
भारत में परिसीमन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
देश में परिसीमन प्रक्रिया का पुराना रिकॉर्ड मौजूद है। भारत में पहली बार परिसीमन साल उन्नीस सौ बावन में हुआ था। इसके बाद तिरसठ और तिहत्तर में यह प्रक्रिया अपनाई गई। साल उन्नीस सौ तिहत्तर में लोकसभा सीटें पांच सौ तैंतालीस तय हुई थीं। दो हजार दो में केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव किया गया था। उस समय कुल सीटों की संख्या बिल्कुल समान रखी गई थी। वर्तमान परिसीमन देश की पांचवीं बड़ी कवायद मानी जा रही है।
