Delhi News: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में एक नया हलफनामा दायर किया है। इसमें केजरीवाल ने न्यायिक निष्पक्षता और ‘हितों के टकराव’ का अहम मुद्दा उठाया है। उनका सीधा दावा है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं। उन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से केस आवंटित होते हैं। तुषार मेहता इसी केस में सीबीआई के वकील हैं।
जज के बच्चों और सीबीआई वकील में कनेक्शन
अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक हलफनामे में एक अत्यंत गंभीर दावा पेश किया है। उन्होंने बताया कि जज के बेटे ईशान शर्मा और बेटी शांभवी शर्मा केंद्र सरकार के पैनल काउंसिल हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इन वकीलों को तुषार मेहता के जरिए केस सौंपे जाते हैं। केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई के वकील ही जज के बच्चों को पेशेवर काम दे रहे हैं। ऐसे में अदालत से उनके खिलाफ निष्पक्ष फैसले की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
आरटीआई के आंकड़ों ने बढ़ाई न्यायिक चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरटीआई से मिली चौंकाने वाली जानकारी को भी अदालत के सामने रखा है। आरटीआई डेटा के अनुसार जज के बेटे को हजारों सरकारी केस आवंटित किए गए हैं। साल 2023 में 2,487 और साल 2024 में 1,784 केस उन्हें सौंपे गए। केजरीवाल का कहना है कि यह सरकारी पद केवल औपचारिक नहीं है। इन पदों से निरंतर आर्थिक और पेशेवर लाभ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इससे पूरी न्याय प्रक्रिया पर गहरा संदेह पैदा होता है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कड़ा पलटवार
केजरीवाल ने अपनी याचिका में इस मामले को किसी अन्य पीठ के पास भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान उन्हें दलीलें रखने का पूरा मौका नहीं मिला। दूसरी ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने अदालत में इन चिंताओं को ‘अपरिपक्व दिमाग की आशंकाएं’ करार दिया है। मेहता ने जज से किसी भी बाहरी दबाव में न आने की अपील की है।
