Himachal News: हिमाचल प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल दिवस पर कोई राहत नहीं दी। प्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते और एरियर की आस लगाए बैठे थे। किन्नौर के रिकांगपिओ में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने कई घोषणाएं कीं। लेकिन कर्मचारियों के वित्तीय लाभ का कोई जिक्र नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में भारी निराशा और आक्रोश है। वे अब सरकार से आर-पार की लड़ाई का मन बना रहे हैं।
तेरह प्रतिशत डीए और एरियर का इंतजार
राज्य के करीब पौने तीन लाख सरकारी कर्मचारी और लगभग 1.71 लाख पेंशनर्स काफी समय से इंतजार कर रहे हैं। इन सभी को अपने 13 प्रतिशत लंबित डीए का बेसब्री से इंतजार था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार इस खास मौके पर खजाना खोलेगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और उन्हें खाली हाथ रहना पड़ा। महंगाई के इस दौर में आर्थिक राहत न मिलने से कर्मचारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। अब उनका धैर्य धीरे-धीरे जवाब दे रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने जाहिर की कड़ी नाराजगी
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सरकार से बड़े तोहफे की उम्मीद थी। वर्तमान सरकार से उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। हिमाचल के कर्मचारियों का वेतन केंद्र और पंजाब के मुकाबले काफी पीछे हो गया है। बढ़ती महंगाई ने कर्मचारियों की कमर तोड़ दी है। यहां तक कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी समय पर पेंशन नहीं मिल पा रही है।
महासंघ ने दी कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी सरकार के इस उदासीन रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार आश्वासन देकर भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं दे रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी तौर पर काफी गरमा सकता है।
सोशल मीडिया पर फूट रहा कर्मचारियों का भारी गुस्सा
कर्मचारी संगठनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी मंच ने लिखा कि अधिकारियों की वेतन कटौती का फैसला वापस लिया गया है। लेकिन आम कर्मचारियों को कोई आर्थिक राहत नहीं दी गई। इस दोहरे मापदंड से कर्मचारियों में असंतोष बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अब कर्मचारी और पेंशनर सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो पूरे प्रदेश में एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।
