Himachal News: हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म घोटाले को लेकर भारी बवाल मच गया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने भ्रष्टाचार के मामले को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंप दिया है। वहीं, अधिकारियों को धमकी देने के आरोपों की जांच पुलिस खुद अपने स्तर पर अलग से कर रही है।
अलग-अलग जांच पर उठे गंभीर सवाल
अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं। सरकार का मकसद मामले में पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना है। हालांकि, जांच प्रक्रिया के इस तरीके की स्थानीय स्तर पर भारी आलोचना हो रही है। लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार और धमकी के आरोप आपस में जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की एक ही एजेंसी द्वारा जांच हो। इससे इस घोटाले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
राजस्व मंत्री के आदेश से मचा हड़कंप
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के आदेश के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मंत्री ने कहा है कि जांच में आरोपी अधिकारियों का शामिल होना न्याय के खिलाफ है। इस आदेश से अब जांच एजेंसियों पर भी भारी दबाव बढ़ गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की अनियमितता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार अब इस संवेदनशील मामले को जल्द और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से सुलझाना चाहती है।
ईको-टूरिज्म परियोजनाओं पर मंडराया संकट
यह विवाद ईको-टूरिज्म परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली अब पूरी तरह से शक के घेरे में है। प्रदेश में कई नए ईको-टूरिज्म स्थल विकसित किए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार के ये गंभीर आरोप सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। पूरे राज्य की नजरें अब इस नई जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं। इसी अहम जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की बड़ी कानूनी कार्रवाई और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।
