India News: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने के बाद देश में भारी सियासी घमासान मचा हुआ है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात साढ़े आठ बजे देश को संबोधित करेंगे। हालांकि सरकार ने अभी संबोधन के विषय की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन सियासी हालात को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण बिल गिरने के मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे। यह संबोधन कई मायनों में बेहद खास होगा।
विपक्ष पर महिलाओं के अधिकार छीनने का गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हुई कैबिनेट की अहम बैठक में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि संसद में इस अहम बिल का गिरना सरकार की कतई हार नहीं है। बल्कि यह सीधे तौर पर देश की करोड़ों महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों का कड़ा विरोध है। प्रधानमंत्री ने इस पूरे मुद्दे को महिला सशक्तिकरण से जोड़ा है। उन्होंने विपक्षी दलों की नीयत और उनकी मंशा पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विपक्ष को भुगतना पड़ेगा राजनीतिक नुकसान
कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन न करना विपक्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल साबित होगी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह कदम महिलाओं को उनका वाजिब हक देने से इनकार करने जैसा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस नकारात्मक रुख का नुकसान विपक्ष को आने वाले समय में भुगतना पड़ेगा। देश की जनता इस पूरे घटनाक्रम को बहुत ही गंभीरता और बारीकी से देख रही है।
पचास सालों तक क्यों नहीं मिला महिलाओं को आरक्षण?
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के पुराने कार्यकाल पर भी करारा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर विपक्ष वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहता था तो पिछले पचास वर्षों में उन्होंने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। प्रधानमंत्री ने पार्टी नेताओं और मंत्रियों को एक खास निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इस महिला विरोधी सोच का असली सच देश के हर एक गांव और घर-घर तक पहुंचाना अब बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी का यह राष्ट्र के नाम संबोधन क्यों है अलग?
बीते बारह वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार राष्ट्र को संबोधित किया है। उन्होंने हमेशा सरकार की बड़ी उपलब्धियों, कड़े सुधारवादी फैसलों या आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर ही देश से बात की है। लेकिन आज का यह संबोधन उनके पिछले सभी संबोधनों से पूरी तरह अलग होने वाला है। सरकार पहली बार ऐसी मुश्किल परिस्थिति का सामना कर रही है जहां लोकसभा में कोई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक गिर गया हो। इसलिए सबकी नजरें इस पर टिकी हैं।
