Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन में चेस्टर-हिल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सीपीआई (एम) ने प्रमोटरों के खिलाफ अपना विरोध बहुत तेज कर दिया है। पार्टी ने बाहरी और गैर-कृषक प्रमोटरों द्वारा बेनामी तरीके से प्रोजेक्ट चलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता को तुरंत पद से हटाने की कड़ी मांग भी की गई है।
नौकरशाहों और रियल एस्टेट कारोबारियों की सांठगांठ
सीपीआई (एम) के राज्य सचिव संजय चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनके साथ कुलदीप तंवर और वीरेंद्र मेहरा भी मौजूद थे। उन्होंने सरकार पर इस घोटाले को सिर्फ नौकरशाहों की लड़ाई बताने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि सरकार की चुप्पी पूरी तरह से संदिग्ध है। प्रमोटरों पर नगर निगम अधिनियम 1994 का स्पष्ट उल्लंघन करने का आरोप है। इससे किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम को कमजोर किया गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं
पार्टी नेताओं ने नौकरशाहों, ठेकेदारों, रियल एस्टेट कारोबारियों और राजनेताओं के बीच सांठगांठ पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस कथित घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की जोरदार मांग रखी है। नेताओं ने बताया कि सोलन नगर निगम और एसडीओ की जांच रिपोर्टों में कानूनों के उल्लंघन की बात सामने आ चुकी है। इन रिपोर्टों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। माकपा ने जल्द बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
धारा 118 के नियमों की अनदेखी का आरोप
माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने सुनियोजित तरीके से धारा 118 को कमजोर किया है। यह अहम धारा गैर-कृषकों को राज्य में बिना अनुमति जमीन खरीदने से रोकती है। इसमें हिमाचल के वे मूल निवासी भी शामिल हैं जो खेती नहीं करते हैं। इस कानून के निरंतर उल्लंघन से राज्य के संसाधनों को भारी खतरा है। पार्टी का दावा है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण माफिया इसका भारी फायदा उठा रहे हैं।
